दिल्ली में 2018 के बाद से इस वर्ष दिसंबर में औसत एक्यूआई 349 के साथ सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई, जबकि पीएम2.5 प्रदूषण में पराली का योगदान मात्र 3.5 प्रतिशत रहा। दिसंबर 2018 में राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 360 दर्ज किया गया था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में औसत एक्यूआई 294, 2023 में 348, 2022 में 319, 2021 में 336, 2020 में 332, 2019 में 337 और 2015 में 301 रहा। इस महीने दिल्ली में पांच दिन वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई। पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में छह दिन ऐसी स्थिति रही थी।
सोमवार को भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता शाम चार बजे 401 के साथ 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गई, जबकि रविवार को यह 390 के साथ 'अत्यंत खराब' श्रेणी में दर्ज की गई। सीपीसीबी के अनुसार, 0 से 50 के बीच का एक्यूआई 'अच्छा', 51 से 100 'संतोषजनक', 101 से 200 'मध्यम', 201 से 300 'खराब', 301 से 400 'बेहद खराब' और 401 से 500 'गंभीर' माना जाता है। इस वर्ष पांच दिसंबर तक दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में पराली का योगदान केवल 3.5 प्रतिशत था, जबकि दिल्ली-एनसीआर देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। पराली जलाने का हिस्सा 2020 और 2021 में 13 प्रतिशत था, जो 2022 में घटकर 9 प्रतिशत हो गया, 2023 में मामूली रूप से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया और 2024 में 10.6 प्रतिशत था, जिसके बाद 2025 में यह घटकर 3.5 प्रतिशत हो गया।
दिल्ली में दिसंबर का वायु गुणवत्ता सूचकांक सात वर्षों में सबसे खराब
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