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पिता को जीवनदान देने के लिए बेटियों ने पेश की मिसाल, एक बेटी ने दी किडनी, तो दूसरी ने दिया अपना लिवर

गाजियाबाद से पिता और बेटियों के अटूट रिश्ते की एक बेहद भावुक और मिसाल पेश करने वाली कहानी सामने आई है। मोरटा गांव में रहने वाले 45 साल के जयंत त्यागी का जीवन लिवर और दोनों किडनियां फेल होने की वजह से खतरे में था। पिता की जान बचाने के लिए उनकी दो बेटियों ने अंगदान का फैसला लिया। बड़ी बेटी ऋषिका ने पिता को अपनी किडनी दी, तो वहीं छोटी बेटी खुशी ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर दिया। दिल्ली-एनसीआर के फोर्टिस अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने यह बेहद जटिल और सफल ऑपरेशन किया है। बेटियों ने जिस तरह अपने पिता को नया जीवन दिया है, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है। 

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दो बेटियों ने अपने पिता की जान बचाने के लिए जो किया वो बहुत कम ही लोग कर पाते हैं. पिता की दोनों किडनियां फेल हो गई थीं और लिवर खराब हो गया था. जिसकी वजह से उनका जीवन खतरे में पड़ गया था. पिता की जान बचाने के लिए एक बेटी ने अपनी किडनी दी और दूसरी ने लिवर देने का फैसला किया.

ये घटना गाजियाबाद के मोरटा गांव की है, गांव में रहने वाले 45 वर्षीय जयंत त्यागी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. परिवार के अनुसार पिछले करीब 11 महीनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी. तीन महीने से अधिक समय तक पेट दर्द रहने के बाद जांच में लिवर में संक्रमण पाया गया, जो बाद में किडनी तक पहुंच गया. हालत बिगड़ने पर उनकी दोनों किडनियां और लिवर फेल हो गए. जयंत त्यागी खेती, किराये के शेड और मैरिज होम के व्यवसाय से जुड़े हैं. परिवार में पत्नी मीनू त्यागी, बड़ी बेटी ऋषिका त्यागी (22 वर्ष), छोटी बेटी खुशी त्यागी (19 वर्ष) और 8 वर्षीय पुत्र कृष्णा हैं. ऋषिका ने बीटेक पूरा कर लिया है वही खुशी बीटेक फर्स्ट ईयर में है 

इस कठिन समय में परिवार की बेटियों ने पिता के प्रति अपने प्रेम और समर्पण की मिसाल पेश की है. परिवार के अनुसार बीटेक की छात्रा ऋषिका त्यागी, जिनकी तीन महीने पहले ही शादी तय हुई थी, ने अपने पिता को किडनी देने का फैसला किया. वहीं बीटेक प्रथम वर्ष की छात्रा खुशी त्यागी ने भी पिता के इलाज के लिए लिवर दान दिया है.

जयंत त्यागी का इलाज फोर्टिस अस्पताल में हुआ यहां उनका सफल ऑपरेशन हुआ है. परिवार को उम्मीद है कि इलाज और परिवार के सहयोग से जयंत जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेंगे. यह घटना पिता और बेटियों के अटूट रिश्ते, त्याग और परिवार की एकजुटता का भावुक उदाहरण बनकर सामने आई है.