महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल मौत मामले की जांच में बुधवार को पुलिस आरोपी चेतन चौधरी को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले लेकर पहुंची, जहां घटना का क्राइम सीन दोबारा रीक्रिएट किया गया। इस दौरान पुलिस ने मृतक के वजन के बराबर एक डमी का इस्तेमाल कर यह समझने की कोशिश की कि घटना कथित तौर पर कैसे हुई थी।
क्राइम सीन रीक्रिएशन के बाद पुणे ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) शुभम कुमार ने बताया कि डमी को मृतक केतन अग्रवाल के वजन के अनुसार तैयार किया गया था। उन्होंने कहा, "हम चेतन चौधरी को घटनास्थल पर लेकर गए, जहां उसने उस दिन की घटनाओं का क्रम बताया। मामले की जांच जारी है। डमी को केतन के वजन के अनुसार तैयार किया गया था।"
पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य फॉरेंसिक गेट (Gait) विश्लेषण के जरिए घटनास्थल पर आरोपी की गतिविधियों और उपलब्ध वीडियो या सीसीटीवी फुटेज से उसके चलने के तरीके का मिलान करना है। गेट एनालिसिस का उपयोग किसी व्यक्ति की चाल के आधार पर उसकी पहचान और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए किया जाता है।
इससे पहले सह-आरोपी सिया गोयल के साथ भी घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएशन किया जा चुका है। जांच के दौरान मंगलवार को लोहागढ़ किले को आम पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। किले पर मौजूद पर्यटकों को बाहर निकालकर पुलिस ने घटनास्थल पर जांच संबंधी कार्रवाई पूरी की।
18 जून को केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया था। लोनावला ग्रामीण पुलिस को संदेह है कि मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल इस समय शादी नहीं करना चाहती थीं और कथित तौर पर परिवार के दबाव में विवाह के लिए तैयार हो रही थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस केस की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को मंजूरी दी है। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम को मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। फिलहाल, सिया गोयल और उसके मित्र चेतन चौधरी को 23 जून को गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपी 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।