पत्नी की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी की अपील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट कहा है कि अदालतों को मुकदमे में निर्णायक भूमिका निभानी चाहिए और गवाहों द्वारा कही गई बातों को रिकॉर्ड करने के लिए सिर्फ टेप रिकॉर्डर की भूमिका नहीं निभानी चाहिए, क्योंकि सत्य तक पहुंचना और न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति करना अदालत का कर्तव्य है. सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि न्याय की सहायता के लिए न्यायाधीश को कार्यवाही की निगरानी करनी होती है. भले ही अभियोक्ता कुछ मामलों में लापरवाह या सुस्त हो, लेकिन अदालत को कार्यवाही को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना चाहिए ताकि अंतिम उद्देश्य यानी सत्य तक पहुंचा जा सके.