रुद्रप्रयाग जिला कांग्रेस कमेटी ने हाल ही में कर्णप्रयाग और नगरासू में हुई घटनाओं को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम जिला अधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय युवाओं के बीच हुए विवाद की जांच हरिद्वार जिले को सौंपे जाने पर आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि यह कदम स्थानीय युवाओं के मानसिक उत्पीड़न के समान है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस मामले की जांच चमोली पुलिस के पास ही रहे।
नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारे पर कब्जा करने की कोशिश, पथराव और गुरुद्वारे से जुड़े लोगों को कथित रूप से बंधक बनाने जैसी घटनाओं में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि मौसम अनुकूल होने के बावजूद चारधाम यात्रा पंजीकरण को अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने तथा कर्णप्रयाग और नगरासू की घटनाओं से चारधाम यात्रा, विशेषकर केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा की छवि प्रभावित हुई है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस यात्रा मार्गों पर असामाजिक तत्वों और हथियार लेकर घूमने वाले लोगों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में विफल रही है। पार्टी ने प्राचीन लक्ष्मण मंदिर के लिए भूमि आवंटित करने की मांग भी की है। पूर्व केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्णप्रयाग घटना में शामिल लोगों के खिलाफ न तो कोई मामला दर्ज किया गया और न ही गिरफ्तारी हुई, जबकि उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि स्थानीय युवाओं की जांच हरिद्वार को क्यों सौंपी गई।
मनोज रावत ने कहा कि दूसरी मांग नगरासू घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनकी शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि देश में आतंकवाद रोकने के लिए उपलब्ध सख्त कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का विरोध सिख समुदाय या गुरुद्वारों से नहीं है, बल्कि उन संस्थाओं से है जिन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त होने का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य गठन के बाद गोविंदघाट पुलिस स्टेशन को एक संस्था को सौंपे जाने जैसी घटनाओं ने कुछ लोगों के हौसले बढ़ाए हैं। उधर, प्रशासन के अनुसार निहंग सिख 20 जून से नगरासू गुरुद्वारे की चौथी मंजिल और छत पर रह रहे थे। इस दौरान पुलिस और प्रशासन लगातार उनके संपर्क में रहा तथा बातचीत के माध्यम से स्थिति को सुलझाने के प्रयास जारी रहे।