Breaking News

Delhi: द्वारका एक्सप्रेसवे अंडरपास जल भराव के चलते किया गया बंद     |   प्रशांत किशोर बांकीपुर से लड़ेंगे उपचुनाव, जनसुराज ने किया ऐलान     |   दिल्ली में बारिश को लेकर बड़ी चेतावनी, मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट     |   यमन के पास रेड सी में कार्गो शिप पर अटैक, ब्रिटिश मिलिट्री ने दी जानकारी     |   अयोध्या: चढ़ावा चोरी के आरोपियों के मोबाइल डाटा से 2 करोड़ से अधिक की चोरी के chat मिले     |  

Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन, जानें कात्यायनी मां की कथा

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसे में नवरात्र के छठे दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है जिन्हें महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि देवी कात्यायनी की पूजा-अर्चना से साधक को शत्रुओं पर विजय मिलती है। 

मां कात्यायनी के स्वरूप की बात करें, तो उनका स्वरूप अत्यन्त दिव्य है और माता की सवारी सिंह है। इनकी चार भुजाएं हैं जिसमे से देवी के दाहिने ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है। वहीं माता का बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प विराजमान है।

मां कात्यायनी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महर्षि कात्यायन ने संतान प्राप्ति के लिए देवी भगवती की कठोर तपस्या की। महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और उन्हें वरदान दिया कि वह उनके घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। एक बार जब महिषासुर नामक के एक दैत्य का अत्याचार बहुत बढ़ गया, जिससे सभी परेशान हो गए। तब त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के तेज से देवी उत्पन्न हुईं, जिसने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया, जिस कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता रानी के घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद ऋषि कात्यायन ने सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद मां कात्यायनी ने दशमी तिथि पर महिषासुर का वध किया, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना गया।