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'आपकी उपलब्धि पदकों से बहुत परे', साइना के संन्यास पर बोले सचिन तेंदुलकर

New Delhi: महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने गुरुवार को बैडमिंटन की पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी साइना नेहवाल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनका करियर इस बात का सबूत है कि महानता समय के साथ आती है और उनकी विरासत पदकों से कहीं ज्यादा बड़ी है।

साइना पिछले दो सालों से घुटने की पुरानी चोट की वजह से खेल से दूर थीं। उन्होंने इस हफ्ते की शुरुआत में प्रतियोगी बैडमिंटन से संन्यास ले लिया। उन्होंने कहा कि उनका शरीर अब एलीट खेल की शारीरिक जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है।

हैदराबाद की 35 साल की साइना ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने अंतिम प्रतियोगी मैच 2023 में सिंगापुर ओपन में खेला था, लेकिन उस समय उन्होंने औपचारिक रूप से संन्यास की घोषणा नहीं की थी। सचिन तेंदुलकर ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "प्रिय साइना, आपका करियर इस बात का सबूत है कि महानता धैर्य, हिम्मत और निरंतरता के साथ, एक-एक दिन करके बनती है।"

"आपने भारतीय बैडमिंटन को दुनिया के मंच पर पहुंचाया और दिखाया कि जब भरोसा तैयारी के साथ मिलता है, तो वो किसी भी खेल का रुख बदल सकता है।पदकों से परे ये आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।" तेंदुलकर ने कहा कि साइना की सबसे बड़ी उपलब्धि पदकों से कहीं ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने देश भर के युवा एथलीटों को ये भरोसा दिलाया कि सबसे ऊंचे स्तर पर सफलता पाना मुमकिन है।

तेंदुलकर ने लिखा, "देश भर के युवा एथलीटों को ये भरोसा दिलाना कि वैश्विक सफलता संभव है। हर खेल का सफर आगे बढ़ता है और जब एक दौर खत्म होता है, तो दूसरा शुरू होता है।"

"एक ऐसा दौर जहां आपका अनुभव, नजरिया और खेल के प्रति प्यार कई लोगों को दिशा दिखाता रहेगा। भारतीय खेल को आपने जो कुछ भी दिया है, उसके लिए धन्यवाद। आपका असर आने वाली पीढ़ियों तक महसूस किया जाएगा।" साइना के करियर पर रियो 2016 ओलंपिक्स में घुटने की चोट का बहुत ज्यादा असर पड़ा था, जिससे उनका करियर खतरे में पड़ गया था।

उन्होंने 2017 में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य और 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतकर जोरदार वापसी की, लेकिन घुटनों की बार-बार होने वाली दिक्कतों ने उनके सफर में रुकावट डालना जारी रखा। 2024 में उन्होंने बताया कि उनके घुटनों में आर्थराइटिस है और उनकी कार्टिलेज घिस गई है, जिससे उच्च स्तरीय प्रतियोगिता के लिए जरूरी गहन प्रशिक्षण करना बहुत मुश्किल हो गया है।