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पीएम सूर्य घर योजना से 9.09 लाख परिवारों को लाभ, 19,035 हाउसिंग सोसाइटियों में सोलर सिस्टम

देश में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ का विस्तार अब हाउसिंग सोसाइटियों तक भी हो रहा है। योजना के तहत देशभर की 19,035 रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में सौर ऊर्जा प्रणाली लगाई जा चुकी है। इससे 9.09 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है। इन आवासीय परिसरों में कुल 278 मेगावाट से अधिक रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की गई है। इसके लिए सरकार की ओर से अब तक 422.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी जारी की गई है।

लिफ्ट और कॉमन एरिया में हो रहा सोलर पावर का इस्तेमाल

हाउसिंग सोसाइटियां सौर ऊर्जा का इस्तेमाल लिफ्ट, कॉमन एरिया की लाइटिंग, वॉटर पंप, सुरक्षा व्यवस्था और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) जैसी साझा सुविधाओं के लिए कर सकती हैं। इससे सोसाइटियों के कॉमन एरिया का बिजली खर्च कम करने में मदद मिल रही है। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, पात्र सौर क्षमता की गणना प्रति परिवार 3 किलोवाट के आधार पर की जाती है। हालांकि, प्रोजेक्ट की अधिकतम क्षमता 500 किलोवाट तक सीमित है। इससे बहुमंजिला सोसाइटियों के निवासी सामूहिक रूप से रूफटॉप सोलर का लाभ ले सकते हैं।

गुजरात में सबसे ज्यादा सोसाइटियां, महाराष्ट्र में सबसे अधिक क्षमता

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में 9,377 हाउसिंग सोसाइटियों ने 106.18 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित की है। इससे करीब 3.54 लाख परिवार लाभान्वित हुए हैं। वहीं, महाराष्ट्र में 7,571 RWA ने मिलकर 138.99 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित की है और करीब 4.28 लाख परिवारों को इसका लाभ मिला है। तेलंगाना में 273, तमिलनाडु में 640 और आंध्र प्रदेश में 248 RWA ने भी सामुदायिक रूफटॉप सोलर को अपनाया है।

प्रति किलोवाट 18 हजार रुपये तक की केंद्रीय सहायता

पात्र RWA और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार 18,000 रुपये प्रति किलोवाट तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) दे रही है। विशेष श्रेणी के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह सहायता 19,800 रुपये प्रति किलोवाट तक है। इनमें पूर्वोत्तर राज्य, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप शामिल हैं। सरकार के अनुसार, RWA के लिए अंतिम सब्सिडी ट्रांसफर पूरा हो चुका है।

सोसाइटियों का बिजली बिल हजारों रुपये तक घटा

लखनऊ के गोखले मार्ग स्थित सूर्या स्क्वायर RWA के अध्यक्ष अखिल जय सिंह के मुताबिक, सोलर प्लांट लगाने से पहले कॉमन एरिया की बिजली पर हर महीने करीब 18,000 रुपये खर्च होते थे। प्लांट शुरू होने के बाद यह खर्च औसतन 3,000 रुपये प्रति माह रह गया है। उन्होंने बताया कि बिजली बिल में बचत से सोसाइटी के मेंटेनेंस फंड का इस्तेमाल पार्कों के रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था, भवन रखरखाव और अन्य साझा सुविधाओं के लिए किया जा रहा है।

इसी तरह गुरुग्राम के सेक्टर-54 स्थित शिव शक्ति अपार्टमेंट्स के सचिव ने बताया कि सोलर सिस्टम लगने के बाद कॉमन एरिया का मासिक बिजली बिल 30,000 रुपये से घटकर करीब 8,000 रुपये रह गया है। इससे सोसाइटी को हर महीने करीब 22,000 रुपये की बचत हो रही है।

हाउसिंग सोसाइटियों में बढ़ रहा सामुदायिक सोलर का इस्तेमाल

रूफटॉप सोलर के जरिए हाउसिंग सोसाइटियों में कॉमन सुविधाओं पर होने वाले बिजली खर्च को कम करने का विकल्प मिल रहा है। योजना के तहत व्यक्तिगत घरों के साथ-साथ आवासीय परिसरों में सामुदायिक स्तर पर सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।