उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित डॉ. बीआर आंबेडकर प्रतिमा स्थलों का विकास और सौंदर्यीकरण कराएगी। डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना के प्रथम चरण में 4,030 प्रतिमा स्थलों को विकसित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 403 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है। योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10-10 प्रतिमा स्थलों का चयन किया गया है। शासन के अनुसार इन स्थलों पर आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के साथ प्रतिमाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक स्वरूप दिया जाएगा। परियोजना को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रतिमा स्थलों पर होंगी जरूरी सुविधाएं
योजना के तहत प्रतिमा स्थलों पर छत, बाउंड्री, रैलिंगयुक्त स्टील की सीढ़ियां, फिनिशिंग, प्रकाश व्यवस्था और हरियाली समेत अन्य जरूरी कार्य कराए जाएंगे। प्रतिमा के नाम और उसके इतिहास की संक्षिप्त जानकारी देने के लिए 3×2.5 फीट आकार का सूचना बोर्ड भी लगाया जाएगा। बोर्ड को जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य ऐसे सार्वजनिक स्थलों को सुरक्षित, स्वच्छ, व्यवस्थित और सम्मानजनक स्वरूप देना है। शासन के अनुसार कई प्रतिमा स्थल छत और बाउंड्री जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे उन्हें मौसम, अतिक्रमण और उपेक्षा से नुकसान का खतरा रहता है।
403 करोड़ रुपये का हुआ आवंटन
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 40,300 लाख यानी 403 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। सितंबर 2026 में धनराशि अवमुक्त होने के बाद 22 सितंबर को निदेशालय स्तर से प्रदेश की 403 विधानसभाओं में स्थित 4,030 प्रतिमा स्थलों के विकास के लिए 403 करोड़ रुपये जिलाधिकारियों के निवर्तन पर आवंटित किए गए।
इस हिसाब से प्रत्येक प्रतिमा स्थल के लिए औसतन 10 लाख रुपये उपलब्ध होंगे। हालांकि, शासनादेश में एक प्रतिमा स्थल के विकास की अधिकतम लागत 40 लाख रुपये निर्धारित की गई है। वास्तविक लागत स्थल की जरूरत के अनुसार तय की जाएगी।
क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं के स्थान पर नई प्रतिमा का प्रावधान
योजना में पुरानी या क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं के स्थान पर संगमरमर की नई प्रतिमा स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले प्रतिमा स्थलों के दीर्घकालीन संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार इस योजना का उद्देश्य केवल निर्माण और सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि महान समाज सुधारकों और राष्ट्रीय विभूतियों से जुड़ी सार्वजनिक स्मृति को संरक्षित करना भी है। सूचना बोर्ड के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रतिमाओं और संबंधित विभूतियों के योगदान की जानकारी देने की व्यवस्था की जाएगी।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति
योजना के क्रियान्वयन और विभागों के बीच समन्वय के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी गठित की गई है। इसमें न्याय, संस्कृति, पर्यटन, वित्त, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर विकास और समाज कल्याण समेत संबंधित विभागों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।इसके साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतरविभागीय समन्वय समिति भी बनाई गई है। इन समितियों के माध्यम से योजना की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय किया जाएगा।
विधानसभा स्तर पर होगा काम
प्रतिमा स्थल के विकास के लिए आवेदन खंड विकास अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी या जिलाधिकारी को दिया जा सकता है। स्थल के विकास का आगणन जिलाधिकारी द्वारा चिन्हित कार्यदायी संस्था से तैयार कराया जाएगा।
निर्माण और सौंदर्यीकरण के कार्य निर्धारित इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों के अनुसार होंगे। योजना का क्रियान्वयन संबंधित विभाग, नगरीय निकाय, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत या ग्राम पंचायत के माध्यम से कराया जा सकेगा। काम पूरा होने के बाद प्रतिमा स्थल का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।
31 दिसंबर 2026 तक पूरा होगा काम
शासन ने योजना के लिए चरणबद्ध समयसीमा तय की है। इसमें प्रस्ताव और आवेदन प्राप्त करने, स्थल निरीक्षण, आगणन तैयार करने तथा निविदा प्रक्रिया के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। सभी चयनित प्रतिमा स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण का काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
403 विधानसभा क्षेत्रों में 4,030 प्रतिमा स्थलों के विकास के लिए 403 करोड़ रुपये का आवंटन प्रदेशभर में डॉ. बीआर आंबेडकर और अन्य महान विभूतियों से जुड़े सार्वजनिक स्थलों को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।