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पश्चिम एशिया में फंसे 23 हजार भारतीय नाविक, यूनियन ने PM मोदी से लगाई गुहार

फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया ने पश्चिम एशिया के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नाविकों (सीफेरर्स) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनके जल्द से जल्द बचाव की मांग की है। यूनियन के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्य विभिन्न जहाजों पर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, “संघर्ष क्षेत्र में कुल 22 भारतीय जहाज फंसे हैं। इसके अलावा ईरानी और अन्य विदेशी जहाजों पर भी भारतीय क्रू मौजूद है। करीब 23,000 भारतीय नाविक इस इलाके में फंसे हैं, जिनमें से अब तक केवल कुछ को ही सुरक्षित निकाला जा सका है, बाकी अभी भी वहीं फंसे हैं।”

उन्होंने बताया कि यूनियन ने कुछ फंसे नाविकों से संपर्क किया है, जो तत्काल रेस्क्यू की मांग कर रहे हैं। “हमने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को दो पत्र लिखे हैं। कुछ नाविकों को वापस लाया गया है, लेकिन कई अब भी ईरान और इजरायल के जलक्षेत्र में जहाजों पर फंसे हुए हैं,” यादव ने कहा। यूनियन ने जहाजों पर मौजूद हालात को लेकर भी चिंता जताई है। यादव ने बताया कि जहाजों पर केवल एक महीने का राशन बचा है, जो तेजी से खत्म हो रहा है। वहीं ईरानी जहाजों पर मौजूद भारतीय नाविकों को यह भी स्पष्ट नहीं है कि हमले किस ओर से हो रहे हैं।

इस बीच, हाल ही में भारतीय एलपीजी कैरियर ‘नंदा देवी’ गुजरात के जामनगर स्थित वडीनार पोर्ट पहुंचा, जिसमें 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी था। इसके बाद शिप-टू-शिप ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे पहले ‘शिवालिक’ नामक एक अन्य एलपीजी जहाज भी सुरक्षित भारत पहुंच चुका है।अधिकारियों के अनुसार, भारतीय नौसेना और ईरानी नौसेना की मदद से जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कराने में सफलता मिली। वहीं, ‘जग लाड़की’ नामक भारतीय जहाज भी सुरक्षित भारत की ओर बढ़ रहा है। शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक फिलहाल सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 22 भारतीय जहाजों पर कुल 611 नाविक मौजूद हैं।