तमिलनाडु में इरोड जिले के सुनंबू नहर में दूषित पानी को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। नहर में उद्योगों का गंदा पानी बिना साफ किए गिरता है। ये लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। कभी इस नहर में नदी का पानी बहता था। अब ये बदबूदार गंदे पानी के नाली में तब्दील हो गया है। नहर का दूषित जल कावेरी नदी में जाता है, जो लाखों लोगों के लिए पीने के पानी का अहम स्रोत है।
यहां रहने वाले बताते हैं कि ये परेशानी लंबे समय से चली आ रही है। दूषित पानी से उन्हें, मवेशियों को और फसलों को काफी नुकसान पहुंच रहा है।
लंबे समय से चल रहे संकट ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। विपक्षी एआईएडीएमके ने राज्य सरकार पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
पार्टी का दावा है कि उनकी सरकार ने केंद्रीय उपचार संयंत्र योजना का प्रस्ताव रखा था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की।
उधर सत्ताधारी डीएमके का कहना है कि अवैध जल निकासी को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इस योजना में मुख्य नहर में प्रदूषित पानी जाने से रोकने और भूजल स्रोतों को दूषित होने से बचाने के लिए समानांतर नहर बनाना शामिल है। कावेरी नदी तमिलनाडु की जीवनरेखा कहलाती है। इससे लाखों लोगों को पीने का पानी मिलता है और बड़े पैमाने पर खेतों की सिंचाई होती है। लिहाजा इरोड में बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोग काफी चिंतित हैं।
विधानसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में प्रदूषण और जल प्रबंधन पर सरकार की गंभीरता काफी हद तक मतदाताओं की राय को प्रभावित कर सकते हैं।
तमिलनाडु में दूषित पानी को लेकर लोग परेशान, सरकार से फौरन प्रबंधन करने की मांग
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