Greater Noida: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को टीबी मुक्त भारत अभियान के अगले चरण का शुभारंभ किया। ये अभियान टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए एक निर्णायक और मिशन-आधारित पहल है। जेपी नड्डा ने कहा कि ये अभियान 15 लाख गांवों और शहरी वार्डों को कवर करेगा, जिनमें से प्रत्येक को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार की गई सूक्ष्म योजनाओं द्वारा निर्देशित किया जाएगा, जिससे कार्यान्वयन में सटीकता और बेहतर परिणाम सुनिश्चित होंगे।
नड्डा ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित राष्ट्रीय टीबी वर्ल्ड 62 सम्मेलन में कहा कि गरीबों, आदिवासी समुदायों और प्रवासी समूहों सहित कमजोर लोगों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, इस पहल का उद्देश्य अंतिम छोर तक की कमियों को दूर करना, शीघ्र निदान को बढ़ावा देना और टीबी सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है, जिससे भारत की जमीनी स्तर पर प्रतिक्रिया को मजबूत किया जा सके।
उन्होंने वैश्विक 'सतत विकास लक्ष्यों' के निर्धारित समय से पहले ही टीबी को पूरी तरह खत्म करने के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। इस अवसर पर भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और नवोन्मेषी, प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों को अपनाने के माध्यम से टीबी से लड़ने के लिए किए जा रहे निरंतर और बहुआयामी प्रयासों के बारे में बात की।
हर साल 24 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व टीबी दिवस, दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक टीबी को समाप्त करने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए वैश्विक आह्वान का काम करता है। इस वर्ष का विषय, "हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं!" टीबी-मुक्त दुनिया हासिल करने के लिए नए सिरे से आशावाद, सामूहिक संकल्प और सभी स्तरों पर गहन कार्रवाई को दर्शाता है, साथ ही टीबी उन्मूलन की दिशा में एक व्यापक और मिशन-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में भारत के नेतृत्व को भी मजबूत करता है।
कार्यक्रम के दौरान नड्डा ने विश्व टीबी दिवस 2026 को टीबी-मुक्त भारत की दिशा में भारत की यात्रा में आत्मचिंतन और कार्रवाई के लिए एक नए आह्वान के रूप में पेश किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में, भारत की टीबी प्रतिक्रिया एक परिवर्तनकारी, जन-केंद्रित आंदोलन के रूप में विकसित हुई है, जो नवाचार, समानता और मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता से प्रेरित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को याद करते हुए, नड्डा ने जन भागीदारी की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि टीबी उन्मूलन एक समग्र सरकारी दृष्टिकोण से एक समग्र समाज आंदोलन में परिवर्तित हो गया है, जहां समुदाय सक्रिय रूप से भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने प्रगति को काफी तेज़ किया है और सभी स्तरों पर स्वामित्व की भावना को मजबूत किया है।
मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी और टीवी से होने वाली मौतों में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। ये दोनों ही आंकड़े वैश्विक औसत से बेहतर हैं। इलाज की कवरेज 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि ऐसे मामले जिनका पता नहीं चल पाता था, उनकी संख्या सालाना 10 लाख से ज्यादा से घटकर एक लाख से भी कम रह गई है; जिससे बता चलता है कि मामलों का पता लगाने के प्रयास तेज हुए हैं।