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प्रेग्नेंसी में “दो लोगों का खाना” सिर्फ एक मिथक, डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली: पीढ़ियों से गर्भवती महिलाओं को यह सलाह दी जाती रही है कि अब उन्हें “दो लोगों के लिए खाना” चाहिए, लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे एक बड़ा मिथक मानता है।

बता दे की, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस धारणा को सच मानकर ज्यादा खाना खाने से अनावश्यक कैलोरी बढ़ती है, वजन तेजी से बढ़ता है और गेस्टेशनल डायबिटीज (GDM) का खतरा भी बढ़ जाता है, जो गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर को प्रभावित करता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी में ज्यादा खाने की नहीं, बल्कि सही और संतुलित पोषण की जरूरत होती है। 

पहले तीन महीनों (पहली तिमाही) में अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत नहीं होती, जबकि दूसरी और तीसरी तिमाही में केवल 300 से 450 कैलोरी अतिरिक्त पर्याप्त होती है, जो एक हेल्दी स्नैक के बराबर है। ज्यादा खाने, खासकर मीठे और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट लेने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और इससे गेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। शोध के अनुसार गर्भावस्था के शुरुआती 20 हफ्तों में तेजी से वजन बढ़ने पर इस बीमारी का जोखिम 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, साथ ही बड़े बच्चे (मैक्रोसोमिया) और सी-सेक्शन की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि यह बीमारी अक्सर बिना लक्षण के होती है, इसलिए समय पर जांच और सही खानपान बेहद जरूरी है। गर्भावस्था में संतुलित डाइट, जैसे आधी प्लेट सब्जियां, एक चौथाई प्रोटीन और एक चौथाई कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, सबसे बेहतर मानी जाती है। 

वही, प्रेग्नेंसी में “दो के लिए खाना” नहीं, बल्कि “समझदारी से खाना” ही मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद है।