हिमाचल प्रदेश में हाल ही में बढ़ी ईंधन कीमतों ने आम लोगों से लेकर पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर राजधानी शिमला में लोग महंगाई बढ़ने और रोजमर्रा के खर्चों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका जता रहे हैं। पर्यटन उद्योग से जुड़े टैक्सी ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और अपेक्षाकृत कम टैक्सी किराए के कारण पर्यटन कारोबार प्रभावित हो सकता है। उनका मानना है कि मौजूदा पर्यटन सीजन के दौरान बढ़ती लागत उनके मुनाफे और कामकाज पर सीधा असर डालेगी।
शिमला पहुंचे पर्यटकों ने भी ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। कर्नाटक से आए एक पर्यटक ने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से यात्रा खर्च बढ़ेगा, जिससे घूमने आने वाले लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। स्थानीय टैक्सी चालकों और ट्रैवल एजेंटों ने कहा कि बढ़ती ईंधन लागत के कारण उनके लिए परिचालन खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से टैक्सी किराए में संशोधन करने या केंद्र सरकार से ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
एक स्थानीय टैक्सी चालक ने कहा कि पर्यटन आधारित व्यवसाय पर निर्भर परिवहन संचालकों के लिए लगातार बढ़ती लागत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। वहीं, शिमला के स्थानीय निवासियों ने भी आशंका जताई कि ईंधन कीमतों में वृद्धि से महंगाई और बढ़ सकती है, जिससे आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे और घरेलू बजट प्रभावित होगा।
एक निवासी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब और दैनिक खर्चों पर पड़ेगा। व्यावसायिक वाहन संचालकों और छोटे व्यापारियों ने भी कहा कि ईंधन मूल्य वृद्धि से आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिसका असर कारोबार की स्थिरता और परिवारों की आय पर पड़ सकता है।