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'संत संसद' 2026: महंत बाबा हठयोगी महाराज ने श्रीकृष्ण के उदाहरण से दिया कर्म और पराक्रम का संदेश

नेटवर्क 10 न्यूज चैनल ने 29 मार्च को ‘संत संसद’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से साधु-संत और महात्मा शामिल हुए। इस आयोजन का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा कोई जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद।” इस विषय पर संतों ने अपने विचार रखे और समाज से जातिवाद से ऊपर उठकर एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

इस भव्य आयोजन में श्री महंत बाबा हठयोगी महाराज जी भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने समाज की वर्तमान मानसिकता और साहस की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल नाम या पहचान से कोई व्यक्ति शक्तिशाली नहीं बनता, बल्कि उसके कर्म, साहस और चरित्र ही उसकी असली पहचान होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समाज में पहले जैसी वीरता और दृढ़ता कम होती दिखाई दे रही है, जिस पर आत्ममंथन की आवश्यकता है।

महाराज जी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए सोमनाथ मंदिर की घटना का उल्लेख किया और कहा कि इतिहास हमें यह सिखाता है कि केवल आस्था के भरोसे बैठने के बजाय कर्म और साहस भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि भगवान भी उसी की सहायता करते हैं, जो स्वयं प्रयास करता है। इसलिए केवल प्रार्थना करने के बजाय कर्म करना आवश्यक है और फिर परिणाम को ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए। 

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि आज हम केवल वृंदावन की रासलीला की कथाओं तक ही सीमित हो गए हैं, जबकि श्रीकृष्ण के जीवन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने धर्म की रक्षा के लिए कई बार रणनीति, साहस और पराक्रम का परिचय दिया, जैसे जरासंध के वध के समय उन्होंने परिस्थिति के अनुसार रूप बदलकर और बुद्धिमत्ता के साथ कार्य किया।
महाराज जी ने यह संदेश दिया कि जीवन में केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि कर्म, साहस और विवेक भी उतने ही आवश्यक हैं। ताकि समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत बन सकें।