बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता शेखर सुमन और कॉमेडियन भारती सिंह के खिलाफ दर्ज 2010 की FIR को रद्द कर दिया है। यह मामला सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित कॉमेडी शो ‘कॉमेडी सर्कस का जादू’ के एक एपिसोड से जुड़ा था। यह FIR पायधोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि शो में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों जैसे “या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!” से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस मामले में IPC की धारा 295-A और 34 के तहत केस दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह एक पारिवारिक मनोरंजन कार्यक्रम था और इसमें बोले गए शब्द एक स्क्रिप्टेड कॉमेडी एक्ट का हिस्सा थे, जिनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 295-A लागू होने के लिए “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा” होना जरूरी है, जो इस मामले में नहीं पाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी प्रदर्शन के कुछ शब्दों को अलग करके नहीं देखा जा सकता।
बेंच ने यह भी कहा कि “रसगुल्ला” और “दही भल्ला” जैसे शब्द सामान्य खाद्य पदार्थ हैं और इन्हें मजाकिया संदर्भ में इस्तेमाल करने से धार्मिक वैमनस्य नहीं फैलता। अदालत ने यह भी पाया कि इस मामले में IPC की धारा 34 के तहत कोई साझा आपराधिक मंशा साबित नहीं होती। साथ ही, इस तरह की कार्रवाई कानून का दुरुपयोग मानी जाएगी। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने FIR और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। यह याचिका शेखर सुमन और भारती सिंह ने दायर की थी।