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भारतीय मूल के वकील नील की दलील, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

 अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में एक भारतीय मूल के वकील हैं, जिन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए व्यापक वैश्विक शुल्क को रद्द करा दिया है। इस फैसले में इन शुल्क की अवैधता को लेकर अमेरिका की सर्वोच्च अदालत में दलीलें दी गईं।

भारतीय अप्रवासियों के बेटे और राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कात्याल ने छोटे व्यवसायों की ओर से इस अहम शुल्क मामले की पैरवी की और जीत हासिल की, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद कात्याल ने एक्स पर पोस्ट किया, “जीत!”

एमएस नाउ को दिए एक इंटरव्यू में कात्याल ने कहा, “अमेरिकी प्रणाली की एक बड़ी खूबी यह है कि आज क्या हुआ। मैं एक अप्रवासी का बेटा अदालत में जाकर अमेरिकी छोटे व्यवसायों की ओर से यह कह सका, देखो, यह राष्ट्रपति गैरकानूनी काम कर रहा है।” उन्होंने कहा, “मैं अपना पक्ष रख सका, उन्होंने मुझसे बहुत कठिन सवाल पूछे, यह एक बहुत ही गहन मौखिक बहस थी और अंत में उन्होंने मतदान किया और हम जीत गए।”

उन्होंने आगे कहा, “यह इस देश की एक असाधारण विशेषता है। यह विचार कि हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था है, जो स्वतः सुधार करती है, जो हमें यह कहने की अनुमति देती है कि ‘आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन फिर भी आप संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकते।’ मेरे लिए आज का यही सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।”

कात्याल का जन्म 1970 में शिकागो में एक बाल रोग विशेषज्ञ माता और इंजीनियर पिता के घर हुआ था, दोनों भारत से आकर यहां बसे थे। कात्याल मिलबैंक एलएलपी के वाशिंगटन डीसी कार्यालय में भागीदार और फर्म के वकील एवं मध्यस्थता समूह के सदस्य हैं। फैसले के बाद एक बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने कानून के शासन और दुनिया भर के अमेरिकियों के लिए आवाज उठाई है।

उन्होंने कहा, “इसका संदेश सीधा था: राष्ट्रपति शक्तिशाली होते हैं, लेकिन हमारा संविधान उससे भी अधिक शक्तिशाली है। अमेरिका में केवल कांग्रेस ही अमेरिकी जनता पर कर लगा सकती है। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने हमारे कानूनी मामले में हर मांग पूरी की। हर एक चीज।” कात्याल ने लिबर्टी जस्टिस सेंटर के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने ‘तब लड़ाई का नेतृत्व किया जब दूसरे नहीं कर रहे थे’।

उन्होंने कहा,“यह मामला हमेशा से राष्ट्रपति पद से जुड़ा रहा है, किसी एक राष्ट्रपति से नहीं। यह हमेशा से शक्तियों के अलगाव का मामला रहा है, न कि तात्कालिक राजनीति का। मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि हमारा सर्वोच्च न्यायालय, जो 250 वर्षों से हमारी सरकार की आधारशिला रहा है, हमारे सबसे मूलभूत मूल्यों की रक्षा कर रहा है।”

मिलबैंक वेबसाइट पर उनके प्रोफाइल के मुताबिक, कात्याल अपीलीय और जटिल मुकदमों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उन्होंने अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 54 मामलों में पैरवी की है। उन्होंने जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय विधि केंद्र में दो दशकों से अधिक समय तक विधि प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया है, जहां वे विश्वविद्यालय के इतिहास में स्थायी और अध्यक्ष पद प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के प्रोफेसरों में से एक थे। उन्होंने हार्वर्ड और येल विधि विद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं दी हैं।

येल विधि विद्यालय से स्नातक कात्याल ने द्वितीय सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय के गुइडो कैलाब्रेसी और अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति स्टीफन जी. ब्रेयर के लिए क्लर्क के रूप में कार्य किया।

उन्होंने 1998-1999 के दौरान न्याय विभाग में उप अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और उप अटॉर्नी जनरल के विशेष सहायक के रूप में भी कार्य किया। कात्याल को अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा “किसी नागरिक को दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार”, एडमंड रैंडोल्फ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो उन्हें 2011 में अटॉर्नी जनरल द्वारा प्रदान किया गया था, उनके प्रोफाइल में यह बताया गया है।

अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें 2011 और 2014 में संघीय अपीलीय नियमों पर सलाहकार समिति में नियुक्त किया था। चार नवंबर, 2025 को एक्स पर एक पोस्ट में, कात्याल ने ट्रंप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के शुल्क मामले से संबंधित ‘निजी प्रतिवादियों के लिए संक्षिप्त विवरण’ पर रखे एक पारंपरिक ‘कड़ा’ (चूड़ी) की तस्वीर पोस्ट की।

कात्याल ने लिखा, “सबसे पहले अपने पिता को याद कर रहा हूं, जो इस स्वतंत्रता की भूमि पर आए थे… संविधान की जीत हो।”