पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक बुधवार शाम 7 बजे राष्ट्रीय राजधानी में होने जा रही है। पश्चिम एशिया में हालात उस समय और बिगड़ गए, जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हो गई। इसके बाद तेहरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
इससे एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी CCS की बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें पश्चिम एशिया के हालात और उससे निपटने के उपायों की समीक्षा की गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी थी।
बैठक में कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSMEs, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों पर संभावित असर और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। देश की समग्र आर्थिक स्थिति और आगे की रणनीति पर भी विचार किया गया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया गया और तात्कालिक व दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की गई।
आम लोगों की जरूरतों—जैसे खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा—की उपलब्धता की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इन आवश्यकताओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक योजनाओं पर विचार किया गया। खरीफ सीजन के लिए किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता और उनकी जरूरतों का भी आकलन किया गया। पिछले कुछ वर्षों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के उपायों के चलते समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने की बात कही गई। भविष्य में आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि देश के सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार है, जिससे बिजली की कमी नहीं होगी।