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अफगानिस्तान भूकंप त्रासदी: 1,400 से अधिक मौतें, सहायता एजेंसियों ने की अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील

अफगानिस्तान में भूंकप के कारण कम से कम 1400 लोगों की मौत और हजारों लोगों के घायल होने के बाद सहायता एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बढ़-चढ़कर देश की सहायता करने का आग्रह किया है। रविवार रात को 6.0 तीव्रता का भूकंप आने के बाद से कुछ ही देशों ने सहायता देने का आश्वासन दिया है। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ये अफगानिस्तान में तीसरा बड़ा भूकंप था। ब्रिटेन सहायता के तौर पर 13 लाख अमेरिकी डॉलर दे रहा है। यह पैसा तालिबान सरकार को नहीं बल्कि सहायता एजेंसियों को दिया जाएगा। ब्रिटेन ने अब तक तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है।

दक्षिण कोरिया ने बुधवार कहा था कि वे संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से 10 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता देगा। ऑस्ट्रेलिया ने 10 लाख अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया है और कहा है कि ये मदद तालिबान सरकार के बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचे, ये सुनिश्चित करने के लिए वह स्थापित साझेदारों के साथ काम करेगा। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ की ओर से भी एक करोड़ 10 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता दी जा रही है जबकि विकास एजेंसियां भी गैर-सरकारी संगठनों या चैरिटी के माध्यम से सहायता पहुंचा रही हैं।

हालांकि पारंपरिक रूप से सहायता करने वाले देश अब तक आगे नहीं आए हैं। एक समय अफगानिस्तान को सबसे अधिक मानवीय सहायता प्रदान करने वाले अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में सहायता देना बंद कर दिया था। ‘वर्ल्ड विजन अफगानिस्तान’ संगठन की निदेशक थामिंद्री डे सिल्वा ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के लोग इस कभी न खत्म होने वाले संकट से थक चुके हैं, जिसका घटती विदेशी मदद और अक्सर सभी प्रयास नाकाम होने की वजह से उन्हें इन हालात का सामना करना पड़ता है।’’

डे सिल्वा ने बताया कि ‘वर्ल्ड विजन’ ने एक निजी दान अभियान शुरू किया है। कुछ सरकारों और राजदूतों ने अफगानिस्तान को सहायता देने का वादा किया है। भारत टेंट और भोजन भेज रहा है। संयुक्त अरब अमीरात ने एक बचाव दल और आवश्यक राहत सामग्री भेजी है। तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान को मिलने वाली विदेशी सहायता में नाटकीय रूप से गिरावट आई है। इस वर्ष मानवीय सहायता के लिए निर्धारित लक्ष्य की तुलना में केवल 28 प्रतिशत सहायता मिल पाई है। ‘नॉर्वियन रिफ्यूजी काउंसिल’ संगठन के अफगान मामलों के निदेशक जैकोपो कैरीडी ने कहा कि स्थानीय संसाधन चरमरा गए हैं और धन की कमी भूकंप से निपटने के प्रयासों के पैमाने और गति को सीमित कर रही है।

कैरीडी ने कहा, ‘‘भूकंप कोई इकलौती आपदा नहीं है। इसने उन समुदायों को प्रभावित किया है जो पहले से ही विस्थापन, खाद्य असुरक्षा, सूखे और पड़ोसी देशों से लाखों अफगान शरणार्थियों की वापसी से जुड़ी समस्या से जूझ रहे थे। कुनार में हमारी टीम ने बताया है कि परिवार खुले में सो रहे हैं और बार-बार आने वाले झटकों को झेल रहे हैं।’’ बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आवश्यकताएं अब भी बहुत अधिक हैं और हम उन सभी से मदद के लिए आगे आने का आग्रह करते हैं जो भूकंप प्रतिक्रिया के लिए सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं।’’