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66 साल के हुए सुपरस्टार मोहनलाल, 400 से अधिक फिल्मों में किया शानदार अभिनय

Mohanlal Birthday: मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल गुरुवार को 66 वर्ष के हो गए। अपने शानदार अभिनय और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर उन्होंने भारतीय सिनेमा में चार दशक से ज्यादा का शानदार सफर तय किया है। 21 मई 1960 को केरल के एलांथूर में जन्मे मोहनलाल विश्वनाथन नायर भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने फिल्मी सफर में मलयालम, तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा की 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

मलयालम सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों में से एक माने जाने वाले मोहनलाल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म 'मंजिल विरिंजा पूक्कल' से की थी। इस फिल्म में उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई थी। 1980 और 1990 के दशक में, उन्होंने समीक्षकों की सराही गई और व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों से उन्होंने खूब शोहरत हासिल की।

उनके कुछ यादगार फिल्मों में ‘किरीदम’, ‘भारतम’, ‘मणिचित्राथाझु’, ‘स्पैडिकम’ और ‘वानप्रस्थम’ शामिल हैं। ‘भारतम’ में उनके किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। वहीं ‘वानप्रस्थम’ से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जमकर तारीफ बटोरीं।

मोहनलाल 'नरसिम्हम', 'पुलिमुरुगन' और 'लूसिफर' जैसी फिल्मों के जरिए ब्लॉकबस्टर मलयालम एंटरटेनर्स का पर्याय बन गए। खास बात ये है कि उनकी 'पुलिमुरुगन' बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली मलयालम फिल्म बनी।

उनकी बहुमुखी प्रतिभा 'किलुक्कम', 'चित्रम' और 'नाडोडीकट्टू' जैसी कॉमेडी क्लासिक्स में भी देखने को मिली। इनमें से कई आज भी दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। हाल के साल में, मोहनलाल ने बेहद सफल थ्रिलर फ्रैंचाइजी 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' के जरिए पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अभिनेता जल्द ही 'दृश्यम 3' सहित अपनी आने वाली कई परियोजनाओं में भी नजर आने वाले हैं।

फिल्मों के अलावा मोहनलाल रंगमंच से भी गहराई से जुड़े रहे। संस्कृत नाटक ‘कर्णभारम’ में कर्ण की भूमिका निभाकर उन्होंने थिएटर प्रेमियों को प्रभावित किया। ‘कथायट्टम’ और ‘छायामुखी’ जैसे नाटकों में उनके अभिनय को भी व्यापक सराहना मिली। अभिनय के साथ-साथ वे निर्माता, निर्देशक, प्लेबैक सिंगर और सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में भी सक्रिय रहे हैं। वहीं 2024 में, उन्होंने बरोज से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा।

कई राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कारों से सम्मानित मोहनलाल को वर्ष 2025 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें भारतीय सिनेमा के विकास और विस्तार में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया। वहीं साल 2001 में भारत सरकार ने भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके बाद 2019 में उन्हें पद्मभूषण मिला, जो देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। 2009 में वे भारत के पहले अभिनेता बने जिन्हें टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि दी गई।

अभिनेता के 66वें जन्मदिन पर, देश भर के प्रशंसक और फिल्म जगत की हस्तियां एक ऐसे कलाकार की अमिट विरासत का जश्न मना रहे हैं, जिनका भारतीय सिनेमा पर प्रभाव अद्वितीय है।