दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने नकली और अवैध तरीके से हासिल की गई महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद, भंडारण और बिक्री करने वाले एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 9 करोड़ रुपये कीमत की दवाएं बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान 588 भरी हुई एंटी-कैंसर दवाओं की शीशियां, 6 खाली शीशियां, दवाओं के 7 खाली डिब्बे और अन्य दवाओं की 3,021 यूनिट बरामद की गईं। इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, रजिस्टर, डायरी और पैकेजिंग सामग्री भी जब्त की गई है।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, यह सिंडिकेट दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य इलाकों में फैले अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए संचालित हो रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में दवा कारोबारी, बिचौलिए और अस्पतालों में काम करने वाले लोग शामिल हैं। आरोप है कि कुछ आरोपी अस्पतालों से कैंसर मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गई एंटी-कैंसर दवाओं को अवैध तरीके से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचाते थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी आनंद कुमार के कब्जे और उसके ठिकानों से 337 एंटी-कैंसर दवाओं की शीशियां और बड़ी मात्रा में अन्य दवाएं बरामद हुईं। वहीं आरोपी दीपक उर्फ रवि के घर से 108 शीशियां और 6.50 लाख रुपये नकद मिले। यह मामला 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जांच की शुरुआत 22 जून को मिली एक गुप्त सूचना के बाद हुई थी। सूचना में बड़े पैमाने पर नकली और महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद, भंडारण और सप्लाई करने वाले संगठित गिरोह की जानकारी दी गई थी।
जांच के दौरान पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में कई संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई। इसके बाद 11 जुलाई को इंटर-स्टेट सेल की सात टीमों ने ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Opdyta, Gazyva, Bavencio, Adcetris और Keytruda जैसी एंटी-कैंसर दवाएं बरामद की गईं।
जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर महंगी एंटी-कैंसर दवाओं को तीन प्रमुख तरीकों से हासिल करते थे। इनमें अनधिकृत स्रोतों से नकली दवाएं खरीदना, अस्पतालों से कैंसर मरीजों के लिए निर्धारित दवाओं को डायवर्ट करना और सरकारी संस्थानों तथा गोदामों से दवाओं को अवैध तरीके से हासिल करना शामिल था। पुलिस के अनुसार, इन दवाओं की खरीद बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों के की जाती थी। इसके बाद दवाओं को घरों और अन्य ठिकानों पर स्टोर कर बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए आगे सप्लाई किया जाता था।
जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि आरोपी कथित तौर पर असली कार्टन और खाली डिब्बों को दोबारा इस्तेमाल कर दवाओं की पैकेजिंग करते थे। दवाओं की पहचान छिपाने के लिए बैच नंबर, एमआरपी और अन्य पहचान चिह्नों को एसीटोन जैसे रसायनों की मदद से हटाया जाता था। दवाओं की खेप तैयार करने के लिए थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, चिपकने वाली टेप और पॉलीथिन का इस्तेमाल किया जाता था। दवाओं के लेन-देन और नकदी के हिसाब से जुड़े रजिस्टर और डायरियां भी पुलिस ने बरामद की हैं। क्राइम ब्रांच अब पूरे सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का पता लगाने, दवाओं के अंतिम खरीदारों की पहचान करने और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा बरामदगी होने की संभावना है।