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दिल्ली में पानी संकट से निपटने की तैयारी तेज, CM रेखा गुप्ता ने की हाई-लेवल समीक्षा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें गर्मियों के दौरान शहर की जल प्रबंधन योजना का आकलन किया गया। इस बैठक में पानी से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीक डिमांड के समय पानी की सप्लाई या शिकायत निवारण में किसी तरह की लापरवाही न हो।

उन्होंने कहा कि हर शिकायत का तुरंत समाधान किया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारा फोकस सिर्फ तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि हम दिल्ली को बार-बार होने वाली पानी की किल्लत से स्थायी रूप से मुक्त करने के लिए दीर्घकालिक समाधान पर भी काम कर रहे हैं।"

बैठक में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मुख्य सचिव राजीव वर्मा और दिल्ली जल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि गर्मियों के लिए तैयारियों को मजबूत किया गया है और सप्लाई को संतुलित बनाए रखने के लिए हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। सभी प्रमुख जल शोधन संयंत्र—सोनिया विहार, भागीरथी, चंद्रावल, वजीराबाद, हैदरपुर, नांगलोई, ओखला, बवाना और द्वारका—को पूर्ण क्षमता पर संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। हरियाणा के साथ समन्वय बनाकर कच्चे पानी में अमोनिया स्तर की निगरानी भी की जा रही है, ताकि जल शोधन प्रक्रिया बाधित न हो। पानी की कमी वाले इलाकों की पहचान कर वहां विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष कई सुधार किए गए हैं। चालू ट्यूबवेल की संख्या 5,834 से बढ़ाकर 6,200 कर दी गई है, जबकि पानी के टैंकर 1,166 से बढ़ाकर 1,210 किए गए हैं। फिक्स्ड सप्लाई प्वाइंट 8,700 से बढ़कर 13,000 हो गए हैं और फिलिंग हाइड्रेंट्स 198 से बढ़कर 202 हो गए हैं। पानी की कमी वाले क्षेत्रों में टैंकरों की आपूर्ति मजबूत करने के लिए 1,210 टैंकर तैनात किए गए हैं और 100 अतिरिक्त टैंकर स्टैंडबाय पर रखे गए हैं। संगम विहार, मटियाला, छतरपुर, देवली, तुगलकाबाद, पालम, बिजवासन और बवाना जैसे अधिक मांग वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर विस्तृत योजना तैयार की गई है, जिसमें जिम्मेदारियों का निर्धारण, कॉलोनी-वार सप्लाई शेड्यूल, टैंकर रूट प्लान और संसाधनों की तैनाती शामिल है। शिकायत निवारण प्रणाली को भी मजबूत किया गया है। 24x7 हेल्पलाइन (1916 और 1800117118) शुरू की गई हैं। शिकायतों को सीधे संबंधित जूनियर इंजीनियर तक पहुंचाया जाता है और 100% फीडबैक सुनिश्चित किया जाता है। इसके अलावा, एक केंद्रीय कंट्रोल रूम, चैटबॉट आधारित सिस्टम और पीपीपी मोड पर कॉल सेंटर भी शुरू किए गए हैं। शहरभर में 28 वॉटर इमरजेंसी सेंटर बनाए गए हैं, जो 24 घंटे काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए द्वारका में दूसरे 50 एमजीडी जल शोधन संयंत्र को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही बवाना जल शोधन संयंत्र में 2 एमजीडी क्षमता के रीसाइक्लिंग प्लांट को जल्द चालू करने की योजना को भी अहम कदम बताया। उन्होंने बताया कि 2025-26 के दौरान 520 नए ट्यूबवेल लगाए गए हैं और 172 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन बदली गई है, जिससे जल आपूर्ति में सुधार हुआ है। इसके अलावा वाल्व रेगुलेशन, नई पाइपलाइन बिछाने, सीवर लाइनों की सफाई और लीकेज को ठीक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।