Breaking News

बजट सत्र: निशिकांत दुबे के संबोधन में से अर्बन नक्सल और टुकड़े टुकड़े शब्द को हटाया गया     |   बांग्लादेश चुनाव में रहमान को 50 सीट, जमात फिलहाल 2 सीटों पर अटकी     |   चुनाव आयोग की कल बंगाल के चुनाव अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक होगी     |   FIR हो, मुकदमा हो या प्रिविलेज प्रस्ताव लाएं - किसानों के लिए लड़ूंगा: राहुल गांधी     |   T20 World Cup 2026: नामीबिया ने जीता टॉस, भारतीय टीम पहले बैटिंग करेगी     |  

लोकसभा स्पीकर को पद से कैसे हटाया जा सकता है? जानिए प्रक्रिया

नई दिल्ली: विपक्षी दलों ने मंगलवार को ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया। उनका आरोप है कि बिरला ने सदन के कार्यों का संचालन करते समय 'खुले तौर पर पक्षपाती' तरीके से काम किया और अपने संवैधानिक पद का "गलत इस्तेमाल" किया। विपक्ष ने उन पर सत्ता पक्ष का समर्थन करने और बजट सत्र के दौरान उसके सदस्यों को बोलने नहीं देने का आरोप लगाया है। लेकिन लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है?

लोकसभा स्पीकर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(C) के तहत, केवल लोकसभा में पारित एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से ही हटाया जा सकता है। इसे लोकसभा के सभी सदस्यों के प्रभावी बहुमत से पारित करना जरूरी होता है। प्रभावी बहुमत का मतलब है- रिक्त सीटों को छोड़कर सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत। यानी प्रस्ताव तभी पास होगा जब आधे से ज्यादा वर्तमान सदस्य इसके पक्ष में मतदान करें।

इसके अतिरिक्त, हटाने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए सदन में लाए जाने से कम से कम 14 दिन पहले एक लिखित नोटिस दिया जाना अनिवार्य है। अगर प्रस्ताव पास हो जाता है, तो स्पीकर को तुरंत हटा दिया जाता है, लेकिन वो संसद सदस्य बना रहता है। हालांकि अगर इसे खारिज कर दिया जाता है, तो स्पीकर अपने पद पर बना रहता है।

करीब 120 से ज्यादा विपक्षी सांसदों का हस्ताक्षर किया हुआ एक नोटिस 10 फरवरी को लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को दिया गया, जिसमें ओम बिरला को स्पीकर पद से हटाने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव पर वर्तमान बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन नौ मार्च को सदन में चर्चा कराई जा सकती है।

जब तक अविश्वास प्रस्ताव पर विचार नहीं हो जाता, ओम बिरला सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। ओम बिरला की तरह पहले भी कई बार लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन ये नाकाम रहीं। अब तक किसी भी लोकसभा अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव या फिर रिमूवल मोशन के जरिए पद से हटाया नहीं जा सका है।