Breaking News

रूस में गैस प्लांट में भीषण आग, 6 चीनी नागरिकों समेत 7 की मौत... 9 अब भी लापता     |   अमेरिका जाने वालों को बड़ा झटका, वीजा अपॉइंटमेंट पर रोक     |   दिल्ली: रेस क्लब को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने याचिका ठुकराई, 15 दिन में करना होगा खाली     |   कर्नाटक में सियासी हलचल तेज, नागेंद्र ने CM को दिया इस्तीफे का ऑफर     |   20 बागी TMC सांसदों को लोकसभा सचिवालय का नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब     |  

8 साल के बच्चे के ग्रोथ हार्मोन इलाज को लेकर दिल्ली HC का केंद्र, दिल्ली सरकार और AIIMS को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक 8 साल के बच्चे के इलाज को लेकर दिल्ली सरकार, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, AIIMS और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। बच्चे को एक ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से उसकी लंबाई और शारीरिक विकास सामान्य तरीके से नहीं हो रहा है। कोर्ट में बच्चे के ग्रोथ हार्मोन का इलाज बिना किसी रुकावट के जारी रखने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। यह याचिका 8 साल 10 महीने के नयन मिश्रा की ओर से उनके पिता ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि बच्चे को जरूरी इलाज मिलना उसका अधिकार है। सुनवाई के दौरान नयन भी अदालत में मौजूद था।

याचिका के अनुसार, नयन को नवंबर 2022 में कम लंबाई और वजन बढ़ने में परेशानी के कारण चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय ले जाया गया था। बाद में उसे AIIMS भेजा गया। वहां जांच में पता चला कि उसके ACAN जीन में बदलाव है। इसकी वजह से उसकी लंबाई कम रह सकती है और उसकी हड्डियों का विकास भी जल्दी हो सकता है।

AIIMS के डॉक्टरों ने नयन को ग्रोथ हार्मोन का इंजेक्शन देने की सलाह दी। इसका पहला इंजेक्शन 11 अक्टूबर 2024 को चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में दिया गया। लेकिन याचिका में आरोप है कि अस्पताल में दवा समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण इलाज कई बार रुक गया। कुछ बार इलाज करीब तीन महीने तक बंद रहा। याचिका के मुताबिक, नयन को आखिरी इंजेक्शन 27 जुलाई को दिया गया था। इसके बाद फिर इलाज बंद हो गया। बच्चे के पिता को कई बार खुद दवा खरीदनी पड़ी या दूसरे सरकारी अस्पतालों के जरिए दवा की व्यवस्था करनी पड़ी।

AIIMS के अनुमान के अनुसार, तीन साल के इलाज में करीब 9 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और वह लगातार इतना खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे को ग्रोथ हार्मोन के इलाज से फायदा हो सकता है। याचिका में कहा गया है कि बच्चे की बढ़ती उम्र में इलाज बार-बार रुकने से उसके विकास पर असर पड़ सकता है। इसलिए कोर्ट से मांग की गई है कि बच्चे के लिए दवा तुरंत उपलब्ध कराई जाए और उसका इलाज लगातार जारी रखा जाए।

याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि अगर चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में दवा उपलब्ध नहीं है, तो AIIMS या किसी दूसरे सरकारी अस्पताल से इलाज की व्यवस्था की जाए। परिवार ने आर्थिक मदद के लिए बिहार सरकार और प्रधानमंत्री चिकित्सा सहायता कोष में भी आवेदन किया है। याचिका में राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति 2021 का भी हवाला दिया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अब इस मामले की सुनवाई 25 सितंबर को होगी।