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Delhi: खराब वायु गुणवत्ता को लेकर विवाद, केंद्र सरकार ने कहा- WHO के निर्देश बाध्यकारी नहीं

Delhi: सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के वायु गुणवत्ता से जुड़े दिशानिर्देश सिर्फ सलाह हैं। उनपर अमल करने की बाध्यता नहीं है। लेकिन पर्यावरणविद् इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि सलाह होने के बावजूद, भारत अपने वायु गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन नहीं कर सकता। वे कहते हैं कि सवाल वैश्विक मानकों का नहीं, बल्कि ये है कि क्या भारत अपने निर्धारित मानकों को पूरा कर सकता है?

जानकारों के मुताबिक बेशक डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों का कानूनी महत्व न हो, भारत के पास अपने वायु गुणवत्ता सूचकांक को मजबूत करने की जिम्मेदारी और क्षमता - दोनों हैं। वे कहते हैं कि देश की विविध भौगोलिक स्थिति, जलवायु और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में क्षेत्र-विशिष्ट, वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ नीतियों की जरूरत है।

संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में ये मुद्दा विवाद का विषय बन गया है। विपक्षी सांसद कई शहरों में बढ़ते प्रदूषण स्तर का हवाला देते हुए सरकार पर एक्यूआई मापदंडों की समीक्षा करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने का दबाव डाल रहे हैं।

शुक्रवार को भी दिल्ली स्मॉग की घनी चादर में लिपटी रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक 332 पर पहुंच गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। साफ है कि मौजूदा मानकों को सख्ती से लागू करने की तत्काल जरूरत है।