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कांग्रेस ने ओम बिरला को पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का दिया नोटिस, कार्यवाही की मांग की

New Delhi: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया और आरोप लगाया कि सदन में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी दलों पर निशाना साधा जो सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन और अवमानना का गंभीर मामला है।

पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने ओम बिरला को दिए नोटिस में ये आग्रह किया कि संसद की गरिमा और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाया जाए, ताकि इस तरह के उल्लंघन को न तो नजरअंदाज किया जाए और न ही दोहराया जाए।

लोकसभा सदस्य वेणुगोपाल ने दावा किया कि बीते 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित नहीं होने के बाद 18 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया था और 29 मिनट के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की और विपक्ष के सदस्यों के मतदान के तरीके का प्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया और इसमें निहित उद्देश्यों को जोड़ दिया।

वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘सबसे पहले देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय चिंता के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। इसलिए, प्रधानमंत्री के ऐसे संबोधन बहुत कम होते हैं। सरकार द्वारा संसद में अपेक्षित बहुमत न जुटा पाने और विपक्षी दलों की आलोचना करने पर प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को संबोधित करना अभूतपूर्व है जो अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग है। देश के प्रधानमंत्री द्वारा इस तरह के बयान दिया जाना सदन के विशेषाधिकार का हनन और अवमानना का गंभीर मामला है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं विशेषाधिकार हनन का यह नोटिस आपको (माननीय अध्यक्ष को) सौंपता हूं, ताकि इस गंभीर घटना और जानबूझकर किए गए विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का संज्ञान लिया जा सके तथा मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सके ताकि प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू की जा सके।’’

वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने को लेकर सवाल उठाया जाना न केवल एक व्यक्तिगत हमला है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।’’

उन्होंने आग्रह किया, ‘‘आप (बिरला) संसद की गरिमा और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाएं, ताकि इस तरह के उल्लंघनों को न तो नजरअंदाज किया जाए और न ही दोहराया जाए।’’