New Delhi: ज्ञान अर्थव्यवस्था के मापन हेतु रूपरेखा विकसित करने के लिए सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा गठित तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) की एक अर्ध-दिवसीय मंथन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 30 सितंबर को डॉ अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित की गई। इसमें केंद्रीय मंत्रालयों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत तथा नीति विचार मंचों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में डॉ सौरभ गर्ग, सचिव, MoSPI तथा डॉ आर बालासुब्रमण्यम, सदस्य (मानव संसाधन), क्षमता निर्माण आयोग एवं अध्यक्ष, TAG भी उपस्थित रहे। कार्यशाला में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
मंथन कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ज्ञान उत्पादों का एक वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) विकसित करना तथा इन ज्ञान उत्पादों एवं सेवाओं के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान को मापने हेतु संभावित मात्रात्मक संकेतकों/डेटा स्रोतों की पहचान करना था। कार्यशाला की शुरुआत में श्री सिद्धार्थ कुंडू, अतिरिक्त महानिदेशक, राष्ट्रीय लेखा प्रभाग, MoSPI ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के एजेंडे की जानकारी दी।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, MoSPI ने ज्ञान अर्थव्यवस्था के मापन के इस नए प्रयास के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसकी पहल MoSPI द्वारा की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देशज एवं पारंपरिक ज्ञान को ज्ञान अर्थव्यवस्था में सम्मिलित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। उन्होंने इस बात की सराहना की कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ ऐसा विचार-विमर्श एक मजबूत रूपरेखा के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।
डॉ आर बालासुब्रमण्यम ने बताया कि MoSPI भारत के लिए एक समग्र "Knowledge Economy Satellite Account" तैयार करने की दिशा में पहला कदम उठा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप होगा। उन्होंने कहा कि पहले हमें ज्ञान वस्तुओं की एक परिभाषित सीमा तय करनी होगी ताकि उन्हें व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत किया जा सके, जिससे एक मानक टैक्सोनॉमी बन सके। यह ज्ञान अर्थव्यवस्था के मापन की दिशा में पहला कदम होगा, जिसके बाद एक व्यापक मापन रूपरेखा तैयार की जाएगी। उन्होंने प्रतिभागी विशेषज्ञों से अपने क्षेत्रों से जुड़े अमूल्य सुझाव साझा करने का आग्रह किया।
कार्यशाला में पांच ब्रेकआउट सत्र आयोजित किए गए, जो विभिन्न श्रेणियों पर केंद्रित थे। डिजिटल ज्ञान, परंपरागत ज्ञान एवं अनुसंधान एवं विकास, व्यावसायिक प्रक्रियाओं में ज्ञान, रचनात्मक एवं सांस्कृतिक ज्ञान, तथा देशज एवं सामुदायिक ज्ञान। इन सत्रों में प्रतिभागियों ने विभिन्न ज्ञान वस्तुओं की पहचान की और उन्हें सम्मिलित/असमाविष्ट करने के लिए मापदंडों पर चर्चा की। चर्चा इस बात पर भी हुई कि मूल्यांकन मैट्रिक्स का विस्तार कैसे किया जाए ताकि ज्ञान का योगदान समुचित रूप से मापा जा सके।
इस विचार-विमर्श से विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कई ज्ञान वस्तुओं की पहचान हुई, जिन्हें उनके व्यक्ति एवं समाज पर पड़ने वाले महत्वपूर्ण प्रभावों के कारण मापन में शामिल किया जाना चाहिए। समूहों ने मौसम पूर्वानुमान, आपदा पूर्वानुमान जैसे प्रसिद्ध ज्ञान वस्तुओं के अलावा पारंपरिक गीत, कानूनी निर्णय, नृत्य, नाटक, पारंपरिक उपचार आदि को भी ज्ञान वस्तु के रूप में पहचाना, जिन्हें ज्ञान अर्थव्यवस्था के समग्र मापन हेतु सम्मिलित किया जाना चाहिए। हालांकि, यह भी उजागर हुआ कि इनमें से कई ज्ञान वस्तुओं का मूल्यांकन करना एक बड़ी चुनौती है।
विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप यह निर्णय लिया गया कि MoSPI, TAG के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में अनुसंधान संगठनों के माध्यम से ज्ञान अर्थव्यवस्था के मापन हेतु विशिष्ट अध्ययन कराएगा और प्रतिभागियों से आग्रह किया गया कि वे इस दिशा में अपने अमूल्य सुझाव देना जारी रखें।