Breaking News

धर्म बदलने के साथ आरक्षण खत्म, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला     |   ‘कानून सबके लिए बराबर, पीड़ितों के साथ खड़े होना क्या गलत: सचिन पायलट     |   'PDA की हवा निकली, इनके समय में विकास नहीं हुआ', मिर्जापुर में बोले CM योगी     |   पाकिस्तान में गिरी स्कूल की छत, मारे गए 17 छात्र, एक टीचर की भी मौत     |   दिल्ली पुलिस ने बस में मारपीट के मामले में NSUI की महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की     |  

तीन पीढ़ियां, एक सपना: मुकेश अंबानी ने कैसे जामनगर को दुनिया के ऊर्जा मानचित्र पर पहुंचाया

धीरूभाई अंबानी ने भारत के आम बचतकर्ताओं को शेयरधारक बनने का मौका दिया। अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने और कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की कहानी उनके बेटे मुकेश अंबानी की है।

किसी बड़े कारोबार को खड़ा करना मुश्किल होता है, लेकिन उसे संभालकर पहले से कहीं बड़ा बनाना एक अलग चुनौती है। साल 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के समय रिलायंस देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल था। कई लोगों को उम्मीद थी कि मुकेश अंबानी अपने पिता के बनाए कारोबार को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन उन्होंने इससे भी बड़ा लक्ष्य चुना। उन्होंने बड़े सपने देखने, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर निवेश करने और पूरे उद्योग की दिशा बदलने की सोच को आगे बढ़ाया।

जामनगर बना भारत की औद्योगिक ताकत का प्रतीक

मुकेश अंबानी की इस सोच का सबसे बड़ा उदाहरण गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित जामनगर है। उनके नेतृत्व में जामनगर दुनिया के सबसे बड़े एकल-स्थल तेल रिफाइनिंग परिसरों में शामिल हुआ। यहां बड़े पैमाने पर ऊर्जा का प्रसंस्करण होता है, जिसकी आपूर्ति दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचती है।

जामनगर गुजरात के लिए सिर्फ एक औद्योगिक केंद्र नहीं है। इस परियोजना ने राज्य में निवेश, रोजगार और तकनीकी कौशल के अवसर बढ़ाए हैं। साथ ही, इससे आपूर्तिकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं का एक बड़ा नेटवर्क भी विकसित हुआ है। अब इसी क्षेत्र में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स के जरिए रिलायंस भविष्य की ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। इसका उद्देश्य नई ऊर्जा तकनीकों और बड़े पैमाने पर उत्पादन के माध्यम से आने वाले समय की जरूरतों को पूरा करना है।

कपड़ों से लेकर खरीदारी और डिजिटल दुनिया तक पहुंचा रिलायंस

नरोदा की कपड़ा मिल ने रिलायंस को भारतीय परिवारों के बीच पहचान दिलाई थी। मुकेश अंबानी ने इस जुड़ाव को और व्यापक बना दिया। रिलायंस रिटेल के जरिए बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक संगठित खुदरा कारोबार का विस्तार हुआ। इसके बाद मीडिया, मनोरंजन, डिजिटल सेवाओं और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में भी रिलायंस ने अपनी जगह बनाई।

एक ही पीढ़ी में रिलायंस का कारोबार कपड़ों के धागे से आगे बढ़कर लोगों की खरीदारी, मनोरंजन और दुनिया से जुड़ने के तरीकों तक पहुंच गया।इसके पीछे वही सोच थी, जिसे धीरूभाई अंबानी ने अपनाया था। बड़े अवसरों वाले क्षेत्रों में प्रवेश करना, बड़े स्तर पर निवेश करना, पुरानी मान्यताओं को चुनौती देना और नए बाजार तैयार करना।

शेयरधारकों से जुड़ाव की विरासत रही कायम

रिलायंस की एक महत्वपूर्ण परंपरा आज भी कायम है—आम निवेशकों के साथ उसका जुड़ाव। साल 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम ने एक बड़ा सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक इश्यू) पेश किया, जिससे आम निवेशकों को इस कारोबार में हिस्सेदारी का अवसर मिला। वर्ष 2009 में रिलायंस पेट्रोलियम का रिलायंस इंडस्ट्रीज में विलय हो गया। 1977 से रिलायंस के साथ जुड़े परिवारों और निवेशकों के लिए यह दशकों पुराने रिश्ते का एक और महत्वपूर्ण अध्याय था।

धीरूभाई अंबानी ने भारतीय मध्यम वर्ग को औद्योगिक विकास में हिस्सेदार बनने का अवसर दिया। वहीं, मुकेश अंबानी ने दिखाया कि इसी विकास को वैश्विक स्तर तक कैसे पहुंचाया जा सकता है। इसी वजह से मुकेश अंबानी को 'नवयुग गुजरात ना शिल्पी' यानी नए युग के गुजरात का निर्माता कहा जाता है। लेकिन रिलायंस की कहानी का सबसे दिलचस्प अध्याय अभी बाकी था। इसकी शुरुआत किसी बोर्डरूम में नहीं, बल्कि अंबानी परिवार की डिनर टेबल पर हुई बातचीत से होने वाली थी।

गुजरात के साथ मिलकर आगे बढ़ने की कहानी

जामनगर की सफलता किसी एक परिवार के प्रयासों का नतीजा नहीं है। इसके पीछे गुजरात की जमीन, समुद्र तट, कर्मचारियों की मेहनत और राज्य का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। समय के साथ रिलायंस और गुजरात के बीच यह साझेदारी मजबूत हुई है। वर्ष 1977 में शेयरधारकों के साथ बने रिश्ते से लेकर आज वैश्विक स्तर पर कारोबार को आगे बढ़ाने में योगदान देने वाले स्थानीय समुदायों तक, इस विकास यात्रा में कई लोगों की भूमिका रही है।

गुजरात इस कहानी में कभी सिर्फ दर्शक नहीं रहा, बल्कि इसका अहम हिस्सा बना रहा है। अब जब रिलायंस की कहानी अगली पीढ़ी की ओर बढ़ रही है, तब भी गुजरात की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। सीरीज का अगला भाग: एक बेटी की शिकायत, एक बेटे की सोच और परिवार की वह बातचीत, जिसने भारत को जोड़ने की कहानी शुरू की।