मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटा हुआ नहीं, बल्कि एकजुट और मजबूत देखना है। हमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। आज का युवा भारत का भाग्य विधाता बनेगा और समाज को बांटने वाली ताकतों को सफल नहीं होने देना है।

मुख्यमंत्री रविवार को राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश के टॉप-10 विद्यालयों को सम्मानित किया और कार्यक्रम की स्मारिका का विमोचन भी किया।
11 लाख से ज्यादा छात्र प्रतियोगिता से जुड़े

सीएम योगी ने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रतियोगिता से 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने यज्ञों के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों को एक साथ बैठाकर सामाजिक एकता का उदाहरण पेश किया।

उन्होंने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। तीनों के रास्ते और स्थान अलग रहे, लेकिन समाज की चेतना को जगाना और भारतीय मूल्यों से जोड़ना उनका साझा उद्देश्य रहा।
समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी कुछ तत्व क्षेत्र, जाति और भाषा के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। यह भारत माता और हमारे पूर्वजों के प्रति अपराध है। राष्ट्र पर संकट आने पर शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्हें समाज को जोड़ने और विभाजनकारी ताकतों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि यज्ञ की वेदी हमें ‘यह मेरा नहीं’ की भावना से जोड़ती है। प्रकृति, पेड़, जल स्रोत, गंगा और सूर्य किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। इसी भावना को समाज में मजबूत करने की जरूरत है।
शिक्षक समाज की चेतना और युगनिर्माता

सीएम योगी ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युगनिर्माता बताया। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक जागृत होकर ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाता है तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगेगी।

उन्होंने तक्षशिला, नालंदा और गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम, महर्षि सांदीपनि-श्रीकृष्ण और चाणक्य-चंद्रगुप्त जैसे उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि भारत की इस श्रेष्ठ गुरु-शिष्य परंपरा को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है।
यूपी में 2017 से अब तक 275 करोड़ पौधे लगाए

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की भावना के तहत उत्तर प्रदेश में 2017 से 2026 तक 275 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधरोपण किया गया है।

उन्होंने कहा कि पौधों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए भी कदम उठाए गए हैं। थर्ड पार्टी के माध्यम से पौधरोपण की रिपोर्ट तैयार कराकर जवाबदेही तय की जाती है, ताकि आने वाली पीढ़ी को बेहतर पर्यावरण मिल सके।
नदियों को बचाना जरूरी

सीएम योगी ने कहा कि नदियां शरीर में धमनियों की तरह हैं। आज कई नदियां प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण संकट में हैं। नदियां नहीं बचेंगी तो जीवन के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि एक सूख चुकी नदी को सैटेलाइट मैपिंग के जरिए चिन्हित कर उसकी खुदाई कराई गई। काम पूरा होने के बाद बारिश में वहां दोबारा जलधारा बहने लगी। उन्होंने कहा कि नदियों को अविरल और निर्मल बनाना सभी की जिम्मेदारी है।
2047 के विकसित भारत के लिए कर्तव्य पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 को लेकर संकल्प स्पष्ट हैं। गुलामी की मानसिकता छोड़ना, अपनी विरासत पर गर्व करना, सामाजिक समता के लिए काम करना, विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना और नागरिक कर्तव्यों को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार हो जाए तो भारत को कोई आंख नहीं दिखा सकता। भारत आने वाले समय में दुनिया का नेतृत्व करेगा।
इन टॉप-10 स्कूलों को किया गया सम्मानित

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश के टॉप-10 विद्यालयों को सम्मानित किया गया। इनमें सीतापुर इंटर कॉलेज, आशुतोष बृज मोहन लाल मेमोरियल कॉलेज, चंद्रशेखर मेमोरियल पब्लिक स्कूल, लखनऊ पब्लिक स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, डॉ. केएन मोदी साइंस एंड कॉमर्स इंटर कॉलेज, शिव प्रताप इंटर कॉलेज, अमर सिंह इंटर कॉलेज, चित्रकूट इंटर कॉलेज और एमजी पब्लिक स्कूल शामिल हैं। कार्यशाला में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के मूल्यों को स्थापित करना जरूरी है। उन्होंने काम, क्रोध, लोभ, स्वार्थ और संकीर्णता को समाज के सामने बड़ी चुनौती बताया।