पुरी, 29 नवंबर (भाषा) श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने शनिवार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शुभंकर मिश्रा द्वारा प्रसारित वीडियो की जांच के लिए एक समिति गठित की, जिसमें जनता से 12वीं शताब्दी के मंदिर से संबंधित जानकारी प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने का आग्रह किया गया है।
एसजेटीए की उप मुख्य प्रशासक की भूमिका निभा रहे जिलाधिकारी दिव्य ज्योति परिदा ने कहा कि यह कदम मिश्रा के यूट्यूब पोस्ट पर व्यापक आक्रोश के बाद उठाया गया है।
वीडियो में कथित तौर पर दावा किया गया है कि राधा रानी के कथित ‘शाप’ के कारण मंदिर में आने वाले अविवाहित जोड़ों को ब्रेकअप का सामना करना पड़ सकता है।
वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि राधा रानी को मंदिर के सेवायतों ने प्रवेश करने से मना कर दिया था और मंदिर को शाप दिया था।
हालांकि, ‘पीटीआई-भाषा’ स्वतंत्र रूप से वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता।
परिदा ने इंन्फ्लुएंसर या उसके वीडियो का नाम लिए बिना कहा, ‘‘वीडियो हमारे संज्ञान में आया है और एक समिति इसकी जांच कर रही है। प्रशासन गलत सूचना, अफवाहें फैलाने या मंदिर के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कदम उठा रहा है। जो लोग ऐसी सामग्री प्रसारित करेंगे, उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’’
पुरी के धार्मिक विद्वानों ने कहा कि इन दावों का धर्मग्रंथों या पुराणों में कोई उल्लेख नहीं है।
श्री जगन्नाथ संस्कृति पर वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. भास्कर मिश्रा ने कहा, ‘‘मेरे पूरे शोध में मुझे ऐसी कहानी कभी नहीं मिली। यह काल्पनिक हो सकता है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता है।’’
वरिष्ठ सेवादार हजूरी कृष्णचंद्र खुंटिया ने कहा, ‘‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत है। वीडियो के पीछे जो व्यक्ति है, उसे हमारी संस्कृति और विरासत का कोई सम्मान नहीं है और वह केवल टीआरपी चाहता है। यह अस्वीकार्य है।’’
सेवादारों और श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से जिम्मेदारी निभाने और सार्वजनिक बयान देने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने का आग्रह किया, तथा चेतावनी दी कि झूठे दावे सांस्कृतिक विरासत को विकृत करते हैं और जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
वीडियो के संबंध में टिप्पणी के लिए मिश्रा से संपर्क नहीं किया जा सका।
भाषा धीरज माधव
माधव