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भाजपा ने कांग्रेस-माओवादियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया

नयी दिल्ली, 29 नवंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कांग्रेस और माओवादियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर ‘‘नक्सली सहानुभूति’’ को बढ़ावा देने तथा इसे राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा बताया।

सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि भारत में नक्सलवाद लंबे समय तक जारी रहा और पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान 'मुख्य रूप से नीतिगत निष्क्रियता के कारण' खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।

पार्टी ने आरोप लगाया गया कि ऐसी स्थिति के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) में सदस्यों के रूप में शामिल किए गए 'शहरी नक्सलियों' का प्रभाव था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के तहत नक्सली प्रभाव में 'उल्लेखनीय गिरावट' आने का दावा करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि 'नक्सलियों के समर्थक' कांग्रेस नेतृत्व में अभी भी 'भरे' हुए हैं।

पोस्ट में कहा गया, 'लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नक्सलियों के प्रति सहानुभूति को बढ़ावा दे रहे हैं...कांग्रेस-नक्सल गठजोड़ राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा है। अब समय आ गया है कि कांग्रेस को जवाबदेह ठहराया जाए और इस खतरनाक गठबंधन का पर्दाफाश किया जाए।'

भाजपा के आरोप पर कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

भाजपा ने आरोप लगाया कि भारत में नक्सली उग्रवाद खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है और संप्रग-दो सरकार के दौरान 'मुख्य रूप से नीतिगत निष्क्रियता' के कारण यह लंबे समय तक जारी रहा।

सत्तारूढ़ दल ने कहा कि एक 'महत्वपूर्ण कारक' एनएसी का प्रभाव था, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गांधी कर रही थीं और इसमें कथित तौर पर नक्सल विचारधारा के प्रति सहानुभूति रखने वाले सदस्य शामिल थे, जिन्हें अक्सर 'शहरी नक्सली' कहा जाता है।

भाजपा ने कहा कि समाचार पत्रों में छपी खबरों के रूप में दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि जब भी सरकार ने नक्सली हिंसा के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने पर विचार किया, तो एनएसी के भीतर शहरी नक्सलियों की आवाजों ने कड़ी आपत्ति जताई।

भाजपा ने कहा, 'चूंकि एनएसी की अध्यक्षता सोनिया गांधी कर रही थीं, इसलिए सरकार अक्सर इस दबाव के आगे झुक जाती थी, जिसके परिणामस्वरूप उग्रवाद विरोधी अभियानों को स्थगित या कमजोर कर दिया जाता था- यहां तक ​​कि उस समय भी जब नक्सली गतिविधियां अपने चरम पर थीं।'

पार्टी ने आरोप लगाया कि शहरी नक्सलियों ने संयम बरतने की वकालत की, जबकि भारत के पूरे हिस्से को बर्बाद कर दिया गया, तथा पूरे गांवों को 'सभ्यता' से काट दिया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि 2007 से 2012 के बीच नक्सलियों ने ग्रामीण विकास की नींव को 'व्यवस्थित रूप से नष्ट' कर दिया।

सत्तारूढ़ पार्टी ने पी चिदंबरम की टिप्पणियों का एक वीडियो क्लिप ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, 'नक्सली जंगलों में बंदूकें और विस्फोटकों का इस्तेमाल करते थे, उनके वैचारिक चचेरे भाई कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा समर्थित सलाहकार परिषदों में प्रभाव रखते थे। सबसे चौंकाने बात थी भारत के तत्कालीन गृह मंत्री द्वारा सशस्त्र विद्रोहियों से सार्वजनिक रूप से हथियार न डालने की अपील और हथियारबंद रहने तक बातचीत की पेशकश।'

भाजपा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गृह मंत्रालय को इस समस्या के खिलाफ निर्णायक रणनीति बनाने का अधिकार दिए जाने से नक्सलवाद के प्रभाव में 'काफी कमी' आई है।

पार्टी ने कहा, 'पहली बार भारत ने न केवल अभियान तेज कर दिए, बल्कि नक्सली खतरे को प्रभावी ढंग से समाप्त करने के लिए समयसीमा की भी सार्वजनिक घोषणा कर दी है - ऐसा लक्ष्य जो अब पहुंच के भीतर दिखाई देता है।'

भाजपा ने कहा, 'नक्सलवाद के प्रभाव में 2000 के दशक के उत्तरार्ध में अपने चरम के बाद से उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है, जब यह समस्या भारत भर के 180 जिलों तक फैली हुई थी। 2024 तक, नक्सलवाद प्रभावत जिलों की संख्या घटकर केवल 38 रह गई। ऐसे जिले मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में 'लाल गलियारे' के भीतर केंद्रित थे।'

भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी 'नक्सली सहानुभूति' को बढ़ावा दे रहे हैं।

पार्टी ने कहा कि हाल ही में सुरक्षा बलों ने देश के सबसे वांछित माओवादी कमांडरों में से एक माडवी हिडमा को मार गिराया।

भाजपा ने कहा, 'इसके बाद जो हुआ उसने पूरे देश को झकझोर दिया: खुद को पर्यावरणवादी बताने वाले लोगों ने दिल्ली के इंडिया गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए, मारे गए आतंकवादी के समर्थन में नक्सल समर्थक नारे लगाए और सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया।'

भाजपा ने कहा, 'राहुल गांधी द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन शहरी नक्सलियों को दिखाने वाले वीडियो को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना विशेष जांच का विषय है।'

भाषा आशीष माधव

माधव