जयपुर, 29 नवंबर (भाषा) भारत के दिग्गज तैराक श्रीहरि नटराज अगले साल होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में धूम मचाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेलों (केआईयूजी) में अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं होने के बावजूद नौ स्वर्ण पदक जीतकर प्रभावित किया।
कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक बेंगलुरु के 24 साल के श्रीहरि ने यहां नौ स्वर्ण और दो रजत सहित कुल 11 पदक जीते। उनकी अगुआई में जैन विश्वविद्यालय तैराकी में 27 स्वर्ण सहित कुल 45 पदक जीतने में सफल रहा।
हाल ही में अहमदाबाद में एशियाई एक्वाटिक्स में सात पदक जीतने वाले श्रीहरि ने काफी जोर नहीं लगाने के बावजूद अपने प्रतिद्वंद्वियों को आसानी से पीछे छोड़ा।
श्रीहरि ने कहा कि उन्हें जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों और अगले साल ग्लास्गो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने का भरोसा है।
नटराज ने केआईयूजी की विज्ञप्ति में कहा, ‘‘एशियन खेलों के समय मैं 25 बरस का हो जाऊंगा और यह वह उम्र है जब तैराक आमतौर पर अपने शीर्ष पर होते हैं। अब मैं अपनी तैराकी, अपने शरीर के बारे में बहुत कुछ जानता हूं और मुझे भरोसा है कि मैं वहां पदक जीत सकता हूं।’’
एशियाई चैंपियनशिप और केआईयूजी में शानदार प्रदर्शन के बाद श्रीहरि ने कहा कि उन्हें टारगेट एशियाई खेल समूह (टीएजीजी) में शामिल होने की उम्मीद थी जिसे सरकार ने टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) की तर्ज पर लॉन्च किया है।
तोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले श्रीहरि ने कहा, ‘‘2018 में पहले खेलो इंडिया खेलों के बाद मुझे टॉप्स के लिए चुना गया और मुझे जो समर्थन मिला उससे मेरे करियर में बड़ा बदलाव आया।’’
श्रीहरि हालांकि पेरिस में प्रभावित करने में नाकाम रहे और 100 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा की हीट में बाहर हो गए जिसके बाद उन्हें टॉप्स कोर समूह से हटा दिया गया।
टीएजीजी को एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले संभावित खिलाड़ियों को अधिक समर्थन देने के लिए पिछले साल बनाया गया था और श्रीहरि को एशियाई एक्वाटिक चैंपियनशिप में कामयाबी के बाद इसमें जगह मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि एशियाई चैंपियनशिप में मेरे सात पदक जीतने के बाद मुझे टीएजीजी के तहत एशियाई खेलों के लिए समर्थन मिल सकता है। मुझे लगता है कि तैराकी में मेरे और साजन (प्रकाश) के अलावा कोई भी एशियाई खेलों में पदक के करीब नहीं है और यह एशियाई खेलों में पदक जीतने का मेरा सबसे अच्छा मौका है।’’
भाषा सुधीर नमिता
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