नयी दिल्ली, 29 नवंबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा कि सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी के एक गिरोह की जांच में पाया गया कि म्यांमा के नागरिकों ने मादक पदार्थों के निर्माण में आवश्यक कच्चे माल की खरीद को आसान बनाने के लिए भारतीयों की जीएसटी प्रमाण पत्रों का ‘दुरुपयोग’ किया।
जांच एजेंसी ने मिजोरम में मादक पदार्थों की तस्करी के एक मामले में धन शोधन का मामला दर्ज होने के बाद 27 नवंबर को भारत-म्यांमा सीमा पर पहली बार छापेमारी की थी।
मिजोरम के आइजोल व चम्फाई (भारत-म्यांमा सीमा पर स्थित), असम के श्रीभूमि (करीमगंज) और गुजरात के अहमदाबाद में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापे मारे गए।
भारत अपने पूर्वी हिस्से में म्यांमा के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है।
प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया कि छापेमारी के दौरान मिले सबूतों से पता चला कि भारतीयों ने म्यांमा के नागरिकों से ‘स्यूडोएफेड्रिन’ गोलियां और ‘कैफीन एनहाइड्रस’ खरीदे, जिससे धन शोधन के अलावा सीमा पार मादक पदार्थों का उत्पादन और तस्करी भी संभव हुई।
ईडी ने बताया कि जांच में पाया गया कि म्यांमा के नागरिकों ने ‘मेथामफेटामाइन टैबलेट’ के निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल की खरीद को आसान बनाने के लिए भारतीय नागरिकों की जीएसटी जानकारियों का ‘दुरुपयोग’ किया।
एजेंसी के अनुसार, इस साजिश ने मादक पदार्थों की तस्करी को बढ़ावा दिया, जिससे विशेष रूप से मिजोरम जैसे राज्य में भारत-म्यांमा सीमावर्ती क्षेत्र प्रभावित हुए और इन गतिविधियों के माध्यम से धन शोधन किया गया।
कुछ हवाला कारोबारियों और अन्य लोगों से 46.7 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई तथा एजेंसी ने छापेमारी के दौरान 21 बैंक खातों के लेन-देन पर रोक लगा दी।
ईडी का यह मामला मिजोरम पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें छह लोगों से 1.41 करोड़ रुपये मूल्य की 4.72 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी।
भाषा जितेंद्र सुरभि
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