(अदिति खन्ना)
लंदन, पांच नवंबर (भाषा) ब्रिटेन की एक अपीलीय अदालत ने दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में 18-वर्षीय छात्र की हत्या के मामले में दोषी करार दिये गए और आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23-वर्षीय ब्रिटिश सिख व्यक्ति की न्यूनतम कारागार की सजा बृहस्पतिवार को बढ़ा दी।
अदालत ने फैसला दिया कि विक्रम दिगवा को पैरोल की अर्हता प्राप्त करने के लिए अब 21 साल के बजाय कम से कम 25 साल कारावास की सजा पूरी करनी होगी। दिगवा ने मामले की सुनवाई के दौरान दलील दी कि उसने आत्मरक्षा में ‘कृपाण’ से वार किया था।
दिगवा को हेनरी नोवाक की हत्या का दोषी पाया गया था। पिछले साल दिसंबर में साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के छात्र नोवाक पर उसने चाकू से पांच बार वार किया था।
इंग्लैंड और वेल्स की मुख्य न्यायाधीश बैरोनेस सू कार ने अपने फैसले में कहा, ‘‘यह तथ्य कि शुरुआत में चाकू को साथ रखना कानूनी था, बाद में इसके गैर-कानूनी इस्तेमाल की गंभीरता को कम नहीं करता है।’’
अदालत ने कहा कि मूल सजा ‘‘जरूरत से ज्यादा नरम’’ थी, और दिगवा को इसके खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
सुनवाई अदालत ने जून में दिये फैसले में दिगवा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और पैरोल के लिए कम से कम 21 साल कारावास की सजा पूरी करने की शर्त रखी थी।
भाषा धीरज सुरेश
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