वाशिंगटन, पांच नवंबर (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच ईरान से हुई गुप्त वार्ता में देश में रह रहे ईरानियों को वापस भेजने के मुद्दे पर भी बातचीत की थी। अदालत के दस्तावेजों में यह खुलासा हुआ है।
अदालती दस्तावेजों को बृहस्पतिवार को सार्वजनिक किया गया, जिनके मुताबिक रिपब्लिकन प्रशासन ने अक्टूबर के मध्य में ही यह कहा था कि उसकी योजना ईरानियों को किसी तीसरे (अज्ञात) देश के रास्ते वापस भेजने की है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं था कि प्रशासन अपनी योजना पर कब अमल करने वाला था।
दस्तावेजों के मुताबिक, मामले की सुनवाई कर रही न्यायाधीश एना रेयेस ने सरकार को आदेश दिया कि ईरानियों को ईरान या किसी अन्य देश भेजने की कोई भी योजना बनाने पर उसकी जानकारी 24 घंटे पहले अदालत को देनी होगी। साथ ही, ऐसी किसी भी कार्रवाई को अंजाम देने से पांच दिन पहले लिखित सूचना देनी होगी।
दस्तावेजों के मुताबिक, प्रशासन ने संघर्ष के दौरान ईरानी अधिकारियों के साथ निष्कासन के मुद्दे पर संपर्क बनाए रखा था, विशेष तौर पर यात्रा दस्तावेज सौंपने और ‘निष्कासन के संभावित रास्ते’ तलाशने के लिए।
न्यायाधीश एना रेयेस द्वारा 15 अक्टूबर की रिपोर्ट में कहा, ‘‘हम एक ऐसे देश के साथ युद्ध की स्थिति में हैं, जिसके बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति ने - कल नहीं तो, बस दो-तीन दिन पहले ही - कहा है कि वहां पूरी तरह से कानून-व्यवस्था का अभाव है... मौजूदा राष्ट्रपति के अनुसार, यह देश अमेरिका का दुश्मन है। हमारे राष्ट्रपति के मुताबिक, इस देश ने हजारों प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘और आप मुझे यह बता रहे हैं कि अमेरिका लोगों को वापस उस इलाके में भेजने जा रहा है, जहां उन्हें- जैसा कि आप, मैं और इसे देखने वाला कोई भी व्यक्ति समझ सकता है- कम से कम, निश्चित मौत के गंभीर खतरे का सामना करना पड़ेगा।’’
एपी धीरज सुरेश
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