नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने संगठित अपराध गिरोह चलाने के मामले में बृहस्पतिवार को पांच लोगों को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के कड़े प्रावधानों के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने कहा कि आरोपियों के ‘‘सुधरने की कोई उम्मीद नहीं है’’।
विशेष न्यायाधीश गौरव राव दोषियों -भूषण उर्फ भारत भूषण उर्फ टोनी, नीरज उर्फ कल्लू, विकास भारद्वाज, जितेंद्र उर्फ जीतू और दीपक उर्फ मंतर- को सजा की अवधि को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुन रहे थे। ये सभी दिल्ली के नरेला के निवासी हैं।
अदालत ने चार नवंबर को पांचों आरोपियों को मकोका की धारा 3(4) के तहत दोषी ठहराया था। यह धारा संगठित अपराध गिरोह का सदस्य होने से संबंधित है।
नीरज को छोड़कर बाकी सभी को मकोका की धारा 3(1)(2) के तहत भी दोषी ठहराया गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘न्याय के उद्देश्य की पूर्ति तभी होगी, जब दोषियों को मकोका की धारा 3(4) के तहत अपराध के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई जाये और इस अपराध के लिए प्रत्येक पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाये।’’
अभियोजक ने अपराधों की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा देने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि दोषियों के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
उन्होंने अदालत को बताया कि दोषी ‘‘काफी समय से कई गंभीर अपराधों में लिप्त रहे हैं’’।
बचाव पक्ष ने अनुरोध किया कि दोषियों को अब तक जेल में बिताई गई अवधि को ही उनकी सजा माना जाये।
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि 37-वर्षीय भूषण के दो नाबालिग बच्चे हैं और वह 2018 में एक अन्य प्राथमिकी के सिलसिले में गिरफ्तारी के बाद से ही हिरासत में है। उन्होंने बताया कि वहीं, 33-वर्षीय नीरज के माता-पिता बीमार हैं और वह 2020 से हिरासत में है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि 32-वर्षीय विकास भारद्वाज के पिता बीमार हैं और वह पहले किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। वहीं, 38-वर्षीय जितेंद्र के दो नाबालिग बच्चे हैं तथा उसकी पत्नी और मां बीमार हैं। इसके अलावा, 40-वर्षीय दीपक की तीन नाबालिग बेटियां हैं।
बचाव पक्ष के अनुसार, ये तीनों 2018 से हिरासत में हैं।
अदालत ने कहा कि दोषियों का बार-बार अपराधों में शामिल होना और गिरोह के दो सदस्यों का पहले भी आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया जाना, उनकी आपराधिक प्रवृत्ति का प्रमाण है। इसने कहा कि ‘‘इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उनके सुधरने की कोई संभावना नहीं है’’।
भाषा
देवेंद्र सुरेश
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