प्रयागराज, पांच नवंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी की अदालत के निर्णय को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
वाराणसी की अदालत ने अमेरिका में गांधी के कथित बयान को लेकर वहां के समाचार पत्र में प्रकाशित खबर को आधार बनाते हुए दायर आवेदन खारिज कर दिया था।
आवेदन में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
समाचार पत्रों में राहुल गांधी के हवाले से लिखा गया था कि मोदी चीन से नहीं लड़ सकते और भारत में सिख सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे।
याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा ने वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सितंबर, 2024 में आवेदन किया था, जिसे अदालत ने 17 अक्टूबर, 2025 को खारिज कर दिया था।
इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी जिसे नौ जुलाई, 2026 को खारिज कर दिया गया था। इन दो आदेशों को उच्च न्यायालय के समक्ष बीएनएसएस की धारा 528 के तहत चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि इसमें कोई दम नहीं है। उन्होंने कहा, “ गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान कुछ समाचार पत्रों में उनके कथित बयान को लेकर उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं जिसकी तिथि, समय या स्थान का कोई उल्लेख नहीं है।”
अदालत ने कहा, “ऐसी स्थिति में एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने कहा, “एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के नाते राहुल गांधी को समाज के किसी वर्ग से जुड़ी चिंताओं को उठाने का अधिकार है। इसके अलावा, किसी चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सवाल उठाना अपने आप में कोई अपराध नहीं हो सकता और राहुल गांधी के उक्त भाषण को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त होगा।”
अदालत ने यह भी कहा कि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा विदेशी धरती पर चिंताएं जताना, कुछ लोगों की नजर में अनुचित हो सकता है या संसदीय लोकतंत्र की पुरानी परंपरा से हटकर हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर उस भाषण को अपराध नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा, “भले ही किसी चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में दिए गए बयान गलत या निराधार पाए जाएं, ऐसे बयानों की संसदीय बहस या खुली सार्वजनिक चर्चा के जरिए पड़ताल करना ही सही रास्ता है ताकि विचारों के स्वतंत्र आदान प्रदान से सच्चाई का पता लगाया जा सके।”
भाषा सं राजेंद्र जोहेब
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