लखनऊ, पांच नवंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कथित अवैध धर्मांतरण गिरोह मामले में दोषी ठहराए गए मौलाना कलीम सिद्दीकी और मोहम्मद उमर गौतम समेत आठ लोगों की सजा के बाद जमानत की अर्जियां बृहस्पतिवार को खारिज कर दीं।
हालांकि, अदालत ने इसी मामले में दोषी ठहराए गए आठ अन्य लोगों को उनकी आपराधिक अपीलों के लंबित रहने के दौरान जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने 16 आपराधिक अपीलों में दाखिल जमानत अर्जियों पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
अदालत ने उमर गौतम, कलीम सिद्दीकी और छह अन्य दोषियों के खिलाफ लगे आरोपों को अत्यंत गंभीर प्रकृति का बताते हुए इस स्तर पर उन्हें जमानत देने का कोई औचित्य नहीं पाया। वहीं, शेष आठ दोषियों की मामले में अपेक्षाकृत कम भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की प्रकृति को देखते हुए अदालत ने उन्हें राहत प्रदान की।
जमानत पाने वालों में मन्नू यादव, अब्दुल्ला उमर, धीरज गोविंदराव जगताप, सरफराज अली जाफरी और राहुल भोला समेत आठ दोषी शामिल हैं।
खंडपीठ ने जमानत पाने वाले सभी आठ दोषियों को निचली अदालत द्वारा लगाए गए जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि दो महीने के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में जुर्माने की आधी राशि जमा नहीं करने पर उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी और उन्हें दोबारा जेल जाना होगा।
उच्च न्यायालय ने मामले से जुड़ी सभी आपराधिक अपीलों को सुनवाई के लिए जनवरी 2027 के पहले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश भी दिया है।
उत्तर प्रदेश की एक विशेष एनआईए-आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) अदालत ने 11 सितंबर 2025 को अवैध धर्मांतरण रैकेट से जुड़े 2021 के एक मामले में 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इनमें इस्लामिक उपदेशक मौलाना कलीम सिद्दीकी और 'इस्लामिक दावा सेंटर' के संस्थापक मोहम्मद उमर गौतम भी शामिल हैं।
विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने अपने आदेश में चार अन्य लोगों को 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी।
भाषा सं. सलीम जोहेब
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