मुंबई, पांच नवंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए प्रति कर्जदार कुल 100 करोड़ रुपये तक का ऋण मंजूर करने का प्रस्ताव किया।
आरबीआई ने प्राथमिकता वाले क्षेत्र को कर्ज (पीएसएल) देने से जुड़े मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा की है। केंद्रीय बैंक ने विभिन्न निर्देशों को एकीकृत करने की अपनी प्रक्रिया के तहत वाणिज्यिक बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों समेत विभिन्न विनियमित संस्थाओं के लिए इस संबंध में नए निर्देश जारी करने का प्रस्ताव किया है।
वाणिज्यिक बैंकों के लिए जारी मसौदा निर्देशों में फसल ऋण, कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए मध्यम और दीर्घकालिक ऋण तथा कटाई से पहले और बाद की गतिविधियों के लिए प्रति कर्जदार इकाई कुल चार करोड़ रुपये की ऋण सीमा प्रस्तावित की गई है।
मसौदे में कहा गया है, ‘‘कृषि बुनियादी ढांचे के लिए एक कर्जदार को बैंकिंग प्रणाली से कुल 100 करोड़ रुपये तक का ऋण मंजूर किया जा सकेगा।’’
कृषि क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण में कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ऋण, कृषि बुनियादी ढांचे और सहायक गतिविधियों के लिए कर्ज शामिल होंगे।
मसौदे के अनुसार, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों समेत शिक्षा के लिए व्यक्तियों को 25 लाख रुपये तक दिए जाने वाले ऋण को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तहत वर्गीकृत किया जा सकेगा।
नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में, बिजली उत्पादन करने वाली नवीकरणीय ऊर्जा आधारित सड़कों पर रोशनी की व्यवस्था तथा दूरदराज के गांवों में विद्युतीकरण जैसी जन केंद्रित कार्यों के लिए कर्जदारों को 35 करोड़ रुपये तक का बैंक ऋण प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तहत आएगा।
मसौदे में कहा गया कि व्यक्तिगत परिवारों के लिए यह ऋण सीमा प्रति कर्जदार 10 लाख रुपये होगी।
कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई), निर्यात, शिक्षा, आवास, सामाजिक बुनियादी ढांचा और नवीकरणीय ऊर्जा प्राथमिकता वाले क्षेत्र की प्रमुख श्रेणियों में शामिल हैं।
भाषा योगेश रमण
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