मुंबई, पांच नवंबर (भाषा) आयकर विभाग अंतरराष्ट्रीय कर सूचना साझा करने के समझौतों के तहत विभिन्न देशों को भेजी जाने वाली जानकारी की गुणवत्ता सुधारने के लिए खाता खोलने से जुड़े नियमों में बदलाव पर वित्तीय क्षेत्र के नियामकों से चर्चा करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
आयकर विभाग के प्रधान महानिदेशक (खुफिया एवं अपराध जांच) देवज्योति दास ने कहा, ‘‘हम नियामकों के साथ बैठक करेंगे और उनसे खाता खोलने की आवश्यकताओं में बदलाव पर विचार करने का अनुरोध करेंगे, ताकि देश के अंतरराष्ट्रीय सूचना साझा करने संबंधी दायित्वों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।’’
उन्होंने कहा कि विदेशी लेनदेन की सूचना देने में विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (एफएटीसीए), साझा रिपोर्टिंग मानक (सीआरएस) और बड़े पैमाने पर धन शोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए) के अनुपालन सहित विभिन्न नियामकीय आवश्यकताएं शामिल हैं।
दास ने कहा कि साझा की जाने वाली जानकारी की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि वित्तीय संस्थान खाता खोलते समय कौन-सा आंकड़ा एकत्र करते हैं।
विभाग आंकड़े जुटाने में आने वाली कठिनाइयों का पता लगाने और मौजूदा नियमों में बदलाव की जरूरत का आकलन करने के लिए बैंकों, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों से सुझाव मांग रहा है।
दास ने कहा कि देशों के साथ साझा की गई रिपोर्ट में पाई गई 97-98 प्रतिशत खामियां करदाता पहचान संख्या (टीआईएन) से संबंधित हैं। इनमें यह संख्या दर्ज नहीं होना, गलत प्रारूप में होना या वास्तविक पहचान संख्या से मेल नहीं खाना शामिल है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्टिंग संबंधी ये प्रावधान भारत में निवेश करने वाले विदेशी नागरिकों पर लागू होते हैं, विदेशों में निवेश करने वाले भारतीयों पर नहीं।
दास ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि उनके द्वारा जमा की गई 97 प्रतिशत रिपोर्ट गलत हैं। इनमें से बहुत कम रिपोर्ट गलत होती हैं। गलत रिपोर्ट में भी 97 प्रतिशत खामियां टीआईएन से संबंधित हैं।’’
उन्होंने कहा कि हर साल खामियों का प्रतिशत घट रहा है, लेकिन भारत में अधिक विदेशी नागरिकों के निवेश करने से रिपोर्ट की संख्या भी बढ़ रही है।
विभाग आंकड़ों के संग्रह और रिपोर्टिंग में सुधार के लिए अनुपालन अधिकारियों, ग्राहक संबंध प्रबंधकों और खाता खोलने से जुड़े कर्मचारियों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम भी जारी रखेगा।
प्रवर्तन के मुद्दे पर दास ने कहा कि विभाग सहयोगात्मक दृष्टिकोण का पक्षधर है और जुर्माना मुख्य रूप से जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने के मामलों में ही लगाया जाना चाहिए।
भाषा
रमण अजय
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