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पुरानी दिल्ली में इमारत ढहने से दो लोगों की मौत, कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आंशका

नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) पुरानी दिल्ली के व्यस्त अजमेरी गेट इलाके में बृहस्पतिवार को एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढह जाने से दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य मलबे के नीचे दब गए।

पुलिस ने बताया कि चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास स्थित गली शाहतारा से जुड़ी एक अन्य तंग गली शीशमहल में बन रही यह इमारत सुबह करीब 9.45 बजे ढह गई। मुड़े हुए तारों, खंभों और कंक्रीट के स्लैब के मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए दिन भर राहत एवं बचाव कार्य जारी रहा।

मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह ने बताया, “मलबे से अब तक चार लोगों को निकाला जा चुका है। इनमें से दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।”

उन्होंने बताया, “जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब यहां करीब 10 से 15 मजदूर मौजूद थे।”

अधिकारियों ने बताया कि यह 50 वर्ग मीटर के भूखंड पर बन रहा एक अनाधिकृत निर्माण था। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इस ढांचे के लिए कोई नक्शा पास नहीं कराया गया था और नगर निगम को इस निर्माण के संबंध में कोई शिकायत भी नहीं मिली थी।

मृतकों की पहचान मंडावली इलाके की रेलवे कॉलोनी के निवासी किशोरी (40) और संजीत (45) के रूप में हुई है, जो निर्माण स्थल पर मजदूर के रूप में काम कर रहे थे। दो अन्य घायल - सहदेव चौधरी (25) और फिरोज (37) का इलाज चल रहा है।

दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली अग्निशमन सेवा और एमसीडी द्वारा संयुक्त रूप से बचाव कार्य चलाया जा रहा है।

पुलिस ने इमारत के मालिकों और ठेकेदारों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

एमसीडी के एक अधिकारी ने बताया कि इमारत में निर्माण कार्य करीब 15 दिन पहले रुक गया था। तीसरी मंजिल तक बन चुकी यह इमारत छत की ढलाई के समय ढह गई।

अधिकारी ने कहा, “इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी और वह ठीक से जम भी नहीं पाई थी, जिसके कारण आखिरकार इमारत ढह गई।”

उन्होंने बताया कि पुलिस ने बिल्डरों की पहचान कर ली है और उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) और सहायक अभियंता (एई) को तत्काल निलंबित करने का भी आदेश दिया। साथ ही अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को तत्काल अनुग्रह राशि प्रदान करने के निर्देश दिए।

गुप्ता ने कहा, “कानून के अनुसार जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद एमसीडी ने जेई और एई को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, पुरानी दिल्ली जोन के उपायुक्त ने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का प्रथम दृष्टया मामला पाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

इससे पहले जून में दिल्ली पुलिस ने भी इस संपत्ति पर हो रहे अवैध निर्माण की ओर ध्यान दिलाया था।

एमसीडी के ‘सिटी एसपी’ जोन के उपायुक्त के नाम लिखे गए पंद्रह जून के पत्र में हौज काजी थाने के प्रभारी ने निगम को सूचित किया था कि वहां अनाधिकृत निर्माण किया जा रहा है। पत्र में निर्माण कार्य को लगभग 70 वर्ग गज में फैले नए निर्माण के रूप में वर्णित किया गया था और जमीन के मालिक तथा ठेकेदार के रूप में फुरकान का नाम दिया गया था।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमारत गिरते ही जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी।

हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे एक निवासी ने कहा, “मेरे परिवार के लोग इमारत के पीछे फंस गए थे, लेकिन वे सुरक्षित हैं। दो लोगों को बाहर निकाला गया है। एक गंभीर रूप से घायल था और बहुत खून बह रहा था, जबकि एक शव को बाहर लाया गया।”

निवासी ने बताया, “इसके मालिक एक ही परिवार के चार सदस्य हैं... वे भाई हैं।”

एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि वह सुबह करीब 10.30 बजे बाजार पहुंचा और बचाव टीमों को मलबे से एक व्यक्ति को निकालते देखा।

उसने कहा, “बचाव टीमों ने हमारे सामने एक व्यक्ति को बाहर निकाला और बाद में एक शव को एम्बुलेंस में ले जाया गया। हमें ठीक से नहीं पता कि कितने लोग फंसे हुए हैं।”

उसने कहा कि लोगों को घटनास्थल के करीब नहीं जाने दिया जा रहा है क्योंकि अधिकारियों को अंदेशा है कि बगल की इमारत भी असुरक्षित हो सकती है।

निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि इसका निर्माण करीब चार महीने पहले शुरू हुआ था और इसे सर्दियों में निर्माण कार्य पर रोक की वजह से इसे जल्दबाजी में बनाया कराया जा रहा था और हादसे से पहले के दिनों में काम तेजी से किया जा रहा था।

राष्ट्रीय राजधानी में ढांचागत सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर चिंता बढ़ाने वाली, दो सप्ताह से भी कम समय में यह दिल्ली में दूसरी बड़ी इमारत ढहने की घटना है।

आंकड़ों के मुताबिक, छह सितंबर से 25 अक्टूबर के बीच इमारत ढहने की तीन बड़ी घटनाएं सामने आईं, जिनमें 13 लोगों की जान चली गई।

पहली घटना छह सितंबर को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में हुई, जहां पांच मंजिला एक इमारत गिर गई जिसका इस्तेमाल पेइंग गेस्ट सुविधा के तौर पर हो रहा था। इसमें छात्रों और श्रमिकों सहित सात लोगों की मौत हो गई।

सात अक्टूबर को दिल्ली के नई सीमापुरी में चार-पांच मंजिला आवासीय इमारत ढह गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए।

तीसरी घटना 25 अक्टूबर को हर्ष विहार के मिलन गार्डन में हुई, जहां एक इमारत का हिस्सा ढह गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।

भाषा नोमान प्रशांत

प्रशांत