नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने आरटीआई आवेदनों के निपटारे में रेलवे द्वारा ‘‘जिम्मेदारी से बचने और एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की प्रवृत्ति’’ पर कड़ी आपत्ति जताई है और उसे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न होने देने की हिदायत भी दी है।
सूचना आयुक्त स्वागत दास ने सहकारी समितियों द्वारा रेलवे की जमीन और संपत्तियों पर अनधिकृत कब्जे तथा उनके दुरुपयोग के आरोपों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगने वाले आरटीआई आवेदन के निपटारे के तरीके पर ‘नाराजगी’ जताई।
सीआईसी ने कहा कि यह सुनिश्चित किए बिना कि मांगी गई जानकारी आवेदकों तक पहुंचे, बार-बार सवालों को एक विभाग से दूसरे विभाग को भेजना पारदर्शिता कानून के उद्देश्य को विफल करता है।
आयोग ने यह भी चेतावनी दी कि प्रशासनिक स्तर पर ‘‘जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की ऐसी घटनाएं’’ दोबारा नहीं होनी चाहिए। साथ ही, निर्देश दिया कि आरटीआई आवेदनों का निपटारा आपसी समन्वय, जवाबदेही और निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाये।
यह मामला नवंबर 2019 में दायर किए गए आरटीआई आवेदन से संबंधित है, जिसमें रेलवे की जमीन और संपत्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर रेलवे बोर्ड को सौंपे गए प्रतिवेदन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया था।
आवेदन को रेलवे बोर्ड से उत्तर रेलवे को भेजा गया। इसके बाद इसे लेखा विभाग, अभियांत्रिकी प्रभाग और कार्मिक शाखा समेत विभिन्न विभागों के बीच आगे भेजा जाता रहा।
आयोग ने कहा कि काफी समय बीत जाने के बावजूद रेलवे यह साबित नहीं कर पाया कि आवेदक को मांगी गई जानकारी से संबंधित पूरा और स्पष्ट जवाब उपलब्ध कराया गया था।
इसने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करना संबंधित सरकारी प्राधिकरण की जिम्मेदारी है और ‘‘इसका बोझ आवेदक पर नहीं डाला जा सकता’’।
आयोग ने उत्तर रेलवे के नोडल केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को निर्देश दिया कि वे आरटीआई अधिनियम की धारा 5(4) के तहत संबंधित विभागों से आवश्यक जानकारी और सहयोग प्राप्त करें।
आयोग ने सीपीआईओ को निर्देश दिया कि वह प्रतिवेदन पर की गई कार्रवाई, उसकी मौजूदा स्थिति और यदि कोई अंतिम निर्णय लिया गया है तो उसका स्पष्ट एवं बिंदुवार विवरण उपलब्ध कराए।
आयोग ने कहा कि यदि इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, तो इसकी भी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
भाषा देवेंद्र शफीक
शफीक