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उप्र: पीएमएचएस चिकित्सकों के लिए सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई का रास्ता खुला, 10 साल की सेवा अनिवार्य

लखनऊ, पांच नवंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के चिकित्सकों के लिए सुपर स्पेशियलिटी समेत उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई का रास्ता आसान कर दिया।

हालांकि, पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद चिकित्सकों को कम से कम 10 साल तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देनी होगी और इस शर्त का उल्लंघन करने पर उन्हें एक करोड़ रुपये का बांड भरना होगा।

उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने बुधवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

पाठक ने बताया कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

शासनादेश के मुताबिक, पीजी डिग्री या डिप्लोमा धारक चिकित्सक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) अथवा समकक्ष प्रवेश परीक्षा के माध्यम से उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकेंगे हालांकि, इसके लिए विभाग की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

पाठक ने बताया, “आवेदन करने वाले चिकित्सकों की अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई, सतर्कता जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, उनके लिए प्रोबेशन अवधि पूरी करना, स्थायीकरण का आदेश जारी होना और सेवा रिकॉर्ड संतोषजनक होना भी अनिवार्य है।”

उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए जाने वाले चिकित्सकों की एमबीबीएस और पीजी डिग्री महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के कार्यालय में जमा रहेंगी। पाठक ने बताया कि पाठ्यक्रम बीच में छोड़ने पर अगले पांच साल तक किसी अन्य उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिलेगा।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा, तीन से अधिक बार परीक्षा में असफल होने पर दोबारा परीक्षा देने के लिए शासन की अनुमति लेनी होगी और पढ़ाई पूरी होते ही चिकित्सकों को अपनी पुरानी तैनाती पर कार्यभार संभालना होगा।

शासनादेश के मुताबिक, पहली बार उच्चतर पाठ्यक्रम की अनुमति पाने वाले चिकित्सकों को दो वर्ष का अध्ययन अवकाश और एक वर्ष का बिना वेतन असाधारण अवकाश दिया जाएगा।

पहले परास्नातक की पढ़ाई कर चुके चिकित्सकों को अध्ययन अवधि के दौरान बिना वेतन अवकाश मिलेगा।

शासनादेश में पहले पीजी कर चुके चिकित्सकों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं और उन्हें दोबारा पढ़ाई की अनुमति मिलने से पहले पिछले पाठ्यक्रम के बाद निर्धारित 10 वर्ष की अनिवार्य सेवा में कम से कम पांच वर्ष पूरे करने होंगे।

इसके अलावा दोबारा पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें पूर्व की शेष सेवा और नई सेवा मिलाकर कुल 15 वर्ष तक सरकारी अस्पतालों में काम करना होगा।

शासनादेश के मुताबिक, पहली सेवा शर्त तोड़ने पर एक करोड़ रुपये और दोबारा पढ़ाई से जुड़ी शर्त का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त एक करोड़ रुपये का बांड भरना होगा।

इस तरह ऐसे चिकित्सकों पर कुल दो करोड़ रुपये तक की देनदारी हो सकती है।

भाषा सलीम जितेंद्र

जितेंद्र