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बेंज कार हादसा मामला : अदालत ने नाबालिग की जमानत के खिलाफ याचिका खारिज की

कोच्चि, पांच नवंबर (भाषा) केरलम की एक अदालत ने मर्सिडीज-बेंज कार से चेरानल्लूर में हुए सड़क हादसे में एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आरोपी 17 वर्षीय बेटे को मिली जमानत के खिलाफ पुलिस और मृतक के परिवार की ओर से दाखिल याचिकाएं बृहस्पतिवार को खारिज कर दीं।

हादसे में जान गंवाने वाले स्कूटर सवार जयबालकृष्णन (55) के परिजनों ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार एवं यौन हिंसा के मामलों से जुड़ी अतिरिक्त जिला अदालत की न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें किशोर न्याय बोर्ड द्वारा नाबालिग को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी।

अदालत ने सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी को पेश होने का निर्देश दिया और यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या किसी नाबालिग द्वारा सड़क दुर्घटना में संलिप्त होने से जुड़े ऐसे ही मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 लागू की गई है।

अदालत के सवाल पर, अभियोजन पक्ष ने जानकारी जुटाई और न्यायाधीश को सूचित किया कि इससे पहले नौ मामलों में भी ऐसी ही कार्रवाई की गई थी।

यह हादसा 24 अक्टूबर की देर रात हुआ, जब चेरानल्लूर के साउथ चित्तूर के रहने वाले जयबालकृष्णन को मारापरम्बु के पास कंटेनर रोड पर एक तेज रफ़्तार मर्सिडीज-बेंज ने टक्कर मार दी जिसे कथित तौर पर नाबालिग चला रहा था।

पुलिस ने शुरुआत में लापरवाही से मौत होने से जुड़ी बीएनएस की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया और नाबालिग को थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया।

इस कदम के बाद चेरानल्लूर पुलिस थाना के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। मृतक के बेटे और बेटी ने कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मांग की कि आरोपी को गिरफ्तार किया जाए और उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाए।

इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप किया। शुरुआती जांच के बाद, पुलिस ने प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 105 जोड़ी जो गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है।

बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग को जमानत दे दी। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में उसके पिता को भी आरोपी बनाया।

इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी।

अदालत द्वारा अपील खारिज किये जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, जयबालकृष्णन की बेटी भद्रकीर्ति ने कहा कि उन्हें निराशा हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां चल रही कार्यवाही किसी नाटक जैसी लग रही है। हमें उम्मीद थी कि चीजें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी, लेकिन इसमें इतने उतार-चढ़ाव आए हैं कि एक आम इंसान यह नहीं समझ सकता कि आखिर हो क्या रहा है। हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा।’’

भद्रकीर्ति ने कहा कि इन घटनाओं ने न्यायपालिका में जनता के भरोसे को हिला दिया है।

भाषा धीरज शफीक

शफीक