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100 साल से खड़ा मकान पुनर्निर्माण के दौरान ढहा, दो की मौत

(अहमद नोमान)

नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) अयूब और उनके भाई बरकतुल्ला ने यह ख्याब में भी नहीं सोचा होगा कि जिस घर में उनका परिवार 100 साल से रहता आया था, वह पुनर्निर्माण कराए जाने के दौरान ढह जाएगा।

पुरानी दिल्ली के अजमेरी गेट इलाके की गली शाहतारा के अंदर संकरी गली शीशमहल में मस्जिद के सामने स्थित उनके पुश्तैनी घर का कुछ महीने पहले बंटवारा हुआ था। इसके बाद दोनों भाई अपने-अपने हिस्से पर मकान बना रहे थे। अयूब का मकान तैयार हो गया था लेकिन बरकतुल्ला का मकान पुनर्निर्माण के दौरान बृहस्पतिवार को ढह गया जिसमें दो मजदूरों की मौत हो गई।

यह इलाका दिल्ली के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में शुमार है। हार्डवेयर की दुकानों से घिरे इस इलाके में अमूमन पैर रखने की जगह नहीं होती है। यहां आज भी कई ऐसे मकान हैं, जो कम से कम एक सदी पुराने हैं। इलाके की ज्यादातर गलियां इतनी संकरी हैं कि दो लोग एक साथ आसानी से उनमें चल भी नहीं सकते।

गली शाहतारा भी ऐसी ही गलियों में से एक है। इसके भीतर एक और गली है, जिसका नाम गली शीशमहल है। इसी गली में करीब 150 गज में बना लगभग 100 साल पुराना एक पुश्तैनी मकान हाल में दो भाइयों के बीच बंटा था।

गली शीशमहल के निवासी तारीक शाह ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि गली में मस्जिद के सामने अयूब और बरकतुल्ला नाम के दो भाइयों के बीच उनके 150 गज के पुश्तैनी मकान का हाल में बंटवारा हुआ था। अयूब का मकान बनकर तैयार हो गया था।

उन्होंने बताया कि बरकतुल्ला के मकान का निर्माण चल रहा था और इसमें तीन मंजिलें बन चुकी थीं और चौथी मंजिल की तैयारी की जा रही थी।

शाह ने बताया कि पहले ऊपर की एक मंजिल गिरी और इसके करीब 15 मिनट बाद पूरी इमारत सीधी नीचे की ओर ढह गई। उनके मुताबिक, घटना के वक्त इमारत में सिर्फ मजदूर थे।

उन्होंने दावा किया कि हादसे के बाद ठेकेदार मौके पर आया और घायलों को अस्पताल ले गया। इसके करीब ढाई घंटे बाद बचाव दलों ने मलबे से दो शव निकाले। शाम को एक और घायल को मलबे से बाहर निकाला गया।

उन्होंने बताया कि परिवार ने मकान बनाने का ठेका एक स्थानीय बिल्डर को दिया था और परिवार गली में ही एक घर में किराये पर रह रहा है। परिवार का हार्डवेयर का कारखाना है। उन्होंने यह भी बताया कि इमारत के सीधे गिरने की वजह से सिर्फ सामने मस्जिद का गेट प्रभावित हुआ और आसपास के घर सुरक्षित हैं।

गली शीशमहल में ही रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर कामरान ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे जब इमारत ढही तो ऐसा लगा, जैसे भूकंप आ गया हो। उन्होंने कहा कि गली बहुत संकरी है और पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग अपने दोपहिया वाहन गली में ही खड़े करते हैं, जिससे रास्ता और संकरा हो जाता है।

उन्होंने कहा, “हमारी गली का एक व्हाट्सऐप ग्रुप है। उस पर संदेश भेजकर लोगों से दोपहिया वाहन हटवाए गए और मलबे में फंसे लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।”

कामरान ने बताया कि दमकल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें बहुत जल्दी मौके पर पहुंच गईं और उन्होंने मोर्चा संभाल लिया।

उन्होंने कहा कि इमारत को मजबूती से बनाया जा रहा था। उनके मुताबिक, इलाके में आम तौर पर गार्डर डालकर मकान बनाए जाते हैं, जबकि इस इमारत को लेंटर से बनाया जा रहा था और इसकी नींव भी काफी मजबूत थी।

स्थानीय निवासी मोहम्मद तकी ने कहा कि पुरानी दिल्ली में आबादी काफी बढ़ गई है, लेकिन यहां जमीन सीमित है। ऐसे में लोग बहुमंजिला इमारतें बना रहे हैं।

उनके मुताबिक, लोगों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वे खुद मकान बनवा सकें। लिहाजा, वे बिल्डरों के साथ मिलकर मकान बनवाते हैं जिसके तहत दो मंजिलें बिल्डर को मिलती हैं और दो मंजिलें जमीन के मालिक को।

उन्होंने दावा किया कि बिल्डर जल्दबाजी में काम करते हैं, जिससे इस तरह के हादसे होते हैं।

एनडीआरएफ के एक कर्मी ने बताया कि जिस गली में मकान ढहा, वह बहुत संकरी है और वहां भारी मशीनें नहीं पहुंच सकतीं। उन्होंने कहा कि जरूरी उपकरण सिर पर रखकर ले जाए गए और मलबा हाथों से हटाया गया।

भाषा नोमान नोमान अविनाश

अविनाश