पटना, पांच नवंबर (भाषा) बिहार विधान परिषद के दो सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर जन सुराज पार्टी के प्रत्याशियों ने बृहस्पतिवार को विधान परिषद के सभापति को याचिका सौंपी।
इन दोनों सदस्यों ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के एक सप्ताह से भी कम समय बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का दावा किया था।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बागी उम्मीदवार राहुल राज के हाथों चुनाव हारने वाले विधान परिषद के पूर्व सदस्य अफाक अहमद और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा सदस्य बंशीधर ब्रजवासी को चुनौती देने वाले विमोहन कुमार ने सभापति रामबचन राय को अपनी याचिकाएं सौंपीं।
बाद में दोनों प्रत्याशियों ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ के साथ पत्रकारों से बातचीत की।
सौरभ ने कहा, “हमारी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुछ दिन पहले इसी तरह की याचिका के माध्यम से सभापति का ध्यान इस घटनाक्रम की ओर आकृष्ट कराया था। हालांकि, हमारे कानूनी सलाहकारों का मानना था कि दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभावित प्रत्याशियों की ओर से भी याचिकाएं दाखिल करना उचित होगा। इसलिए हम यहां आए हैं।”
ब्रजवासी और राहुल राज ने भाजपा कार्यालय में आयोजित विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने के बाद भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी।
इस दौरान दोनों ने अपनी सदस्यता पर्चियां हाथ में लेकर और कमल चुनाव चिह्न छपे भगवा गमछे पहनकर तस्वीरें भी खिंचवाई थीं। इस घटनाक्रम की सभी विपक्षी दलों ने आलोचना की थी।
भाजपा की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) भी इससे नाराज बताई जा रही है, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से इन दोनों सीट पर जदयू ने चुनाव लड़ा था।
राजग के एक अन्य सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस घटनाक्रम पर सवाल उठाए थे।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने पिछले महीने हुए इन चुनावों में किसी भी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था।
उन्होंने कहा था कि ऐसे उम्मीदवारों को गठबंधन में शामिल करने से ‘नैतिकता का सवाल'’ खड़ा होता है, जिन्होंने गठबंधन के सहयोगियों के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार दावा कर रहे हैं कि दल बदलने वाले दोनों सदस्यों की सदस्यता निश्चित रूप से समाप्त होगी, क्योंकि उन्होंने संविधान में निर्धारित दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया है।
वहीं, भाजपा ने इस विवाद पर विराम लगाने की कोशिश करते हुए कहा है कि दोनों सदस्य पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं बल्कि उन्होंने केवल भाजपा को अपना समर्थन दिया है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में इस विवाद से जुड़े सवाल पर भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का रुख दोहराया।
यादव ने कहा, “दोनों सदस्य हमारी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं। उन्होंने हमें अपना समर्थन दिया है।”
भाषा कैलाश जितेंद्र
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