नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों, अल्पसंख्यक शरणार्थियों, श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों समेत भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों की कई श्रेणियों के लिए पासपोर्ट और वीज़ा नियमों में ढील दी है। इस संबंध में जारी की गयी एक अधिसूचना से यह जानकारी सामने आयी।
बृहस्पतिवार को प्रकाशित 'आव्रजन एवं विदेशी (छूट) (संशोधन) आदेश, 2026' में नेपाल, भूटान और भारत के नागरिकों के इन पड़ोसी देशों के बीच यात्रा करने के लिए यात्रा तथा पहचान संबंधी प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी संशोधित नियमों के तहत, 31 दिसंबर 2009 को या उससे पहले स्थायी रूप से बसने के इरादे से भारत आए पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट नवीनीकरण की सामान्य शर्तों से छूट दी गई है। यह छूट उन लोगों के लिए है, जो पाकिस्तान द्वारा जारी 'कंप्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र' (सीएनआईसी) न होने के कारण अपने यात्रा दस्तावेजों का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं।
इस छूट की पात्रता के लिए जरूरी है कि उन्होंने पाकिस्तान में विवाह न किया हो और वहां कोई अचल संपत्ति अर्जित न की हो। पाकिस्तान जाते समय उनके परिवार के सदस्य भारतीय नागरिक रहे हों और उन्हें यह वचन भी देना होगा कि वे उस देश में वापस नहीं लौटेंगे।
अधिसूचना में कहा गया है कि उनके खिलाफ पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों की कोई प्रतिकूल रिपोर्ट भी नहीं होनी चाहिए।
छूट के दायरे में आने वाली तीसरी श्रेणी में भारतीय मूल के वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने मलेशिया या सिंगापुर की नागरिकता ले ली थी और उन देशों द्वारा जारी पासपोर्ट पर 31 दिसंबर, 2009 को या उससे पहले भारत लौट आए थे।
ये पासपोर्ट समयसीमा पार कर चुके हों और उनका नवीनीकरण नहीं कराया गया हो, क्योंकि संबंधित व्यक्ति उन देशों की नवीनीकरण शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।
अधिसूचना के अनुसार, इस उपबंध के उद्देश्यों के लिए, ‘भारतीय मूल के व्यक्ति’ का अर्थ एक ऐसा विदेशी नागरिक है (जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल और चीन का नागरिक न हो), जिसके पास कभी भारतीय पासपोर्ट रहा हो; या वह, अथवा उसके माता-पिता, दादा-दादी/नाना-नानी, या परदादा-परदादी/परनाना-परनानी भारत में पैदा हुए हों और 'भारत सरकार अधिनियम, 1935' में उल्लिखित क्षेत्रों या बाद में भारत का हिस्सा बने क्षेत्रों में स्थायी रूप से निवासी रहे हों। शर्त यह है कि इनमें से कोई भी कभी भी ऊपर बताए गए देशों का नागरिक न रहा हो।
भारत में अपना प्रवास जारी रखने के लिए, तीनों श्रेणियों के लोगों को उपयुक्त श्रेणी का वीजा प्राप्त करना होगा।
अधिसूचना में कहा गया है कि भारतीय, नेपाली और भूटानी नागरिक, जो इन पड़ोसी देशों के बीच सड़क या हवाई मार्ग से सीधे यात्रा कर रहे हैं, वे मानक पासपोर्ट के बजाय सरकार के आधिकारिक ‘वीजा नियमावली’ में बताए गए पहचान दस्तावेज़ दिखा सकते हैं।
इसमें आगे कहा गया है कि इस खंड के तहत दी गई छूट, भारत के उन नागरिकों पर लागू नहीं होगी, जो नेपाल या भूटान के अलावा अन्य देशों से भारत-नेपाल या भारत-भूटान सीमा के रास्ते (सड़क या हवाई मार्ग से) आ-जा रहे हैं। ऐसे सभी मामलों में, उनके पास वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है और भारत से बाहर जाने या भारत में प्रवेश करने के लिए उन्हें केवल निर्धारित आव्रजन चौकियों (इमिग्रेशन पोस्ट) का ही उपयोग करना होगा।
भारत में प्रवेश करने वाले या यहां से बाहर जाने वाले नेपाल और भूटान के उन नागरिकों के पास वैध पासपोर्ट और वैध वीज़ा दोनों का होना ज़रूरी है, यदि वे चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान से आ रहे हैं या इन देशों से होकर गुजर रहे हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि तीसरे देशों से आने-जाने के लिए क्षेत्रीय सीमाओं को पार करने के मामले में भी पासपोर्ट संबंधी सामान्य नियम अनिवार्य बने रहेंगे।
ये नियम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के उन लोगों को छूट देते हैं, जो धार्मिक उत्पीड़न या उसके डर के कारण शरण लेने को मजबूर हुए और 31 दिसंबर, 2024 को या उससे पहले भारत आ गए।
भाषा राजकुमार सुरेश
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