नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को घरेलू निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को बिना अंतर्निहित जोखिम के मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों (विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से जुड़े वित्तीय अनुबंध) में पांच लाख डॉलर तक की पोजिशन लेने की अनुमति दे दी।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 10 अक्टूबर के परिपत्र के अनुरूप नियमों में संशोधन किया है। आरबीआई ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों में अंतर्निहित जोखिम के बिना स्थिति लेने की सीमा में बदलाव किया था।
सेबी के परिपत्र के मुताबिक, संशोधित व्यवस्था के तहत घरेलू ग्राहक और एफपीआई भारतीय रुपये से जुड़े सभी मुद्रा जोड़ों में मान्यताप्राप्त शेयर बाजारों में मिलाकर अधिकतम पांच लाख डॉलर के बराबर मूल्य की लॉन्ग या शॉर्ट पोजिशन ले सकेंगे। यह सीमा किसी भी समय बकाया कुल सौदों के सांकेतिक मूल्य पर लागू होगी।
सेबी ने स्पष्ट किया है कि एफपीआई की सभी विदेशी मुद्रा-रुपये जोड़ों के अनुबंधों में कुल शॉर्ट पोजिशन पांच लाख डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
पांच लाख डॉलर की सीमा से अधिक की लॉन्ग पोजिशन लेने वाले एफपीआई के पास भारतीय ऋण या इक्विटी प्रतिभूतियों में अंतर्निहित जोखिम होना जरूरी होगा। इसमें इक्विटी और ऋण म्यूचुअल फंड की इकाइयां भी शामिल हैं।
घरेलू ग्राहक इस सीमा से अधिक की पोजिशन भी ले सकेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें आरबीआई के 10 अक्टूबर को जारी जोखिम प्रबंधन और अंतर-बैंक लेनदेन संबंधी मास्टर निर्देश में तय शर्तों का पालन करना होगा।
सेबी ने शेयर बाजारों और समाशोधन निगमों को संशोधित प्रावधानों को लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्था करने और अपने नियमों एवं विनियमों में आवश्यक बदलाव करने को कहा है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय