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उप्र: फार्म-6 के दोहरे आवेदन रोकने के लिए जन सुविधा केन्द्र संचालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा

लखनऊ, पांच नवंबर (भाषा)उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए भरे जाने वाले फार्म-6 के एक से अधिक बार जमा होने से होने वाली दोहरी प्रविष्टियों को रोकने के लिए जन सुविधा केंद्र (सीएससी) संचालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बृहस्पतिवार को बताया कि ऑनलाइन आवेदन करते समय मोबाइल फोन पर संदर्भ संख्या (रेफरेंस नंबर) का संदेश नहीं मिलने के कारण कई आवेदक दोबारा फार्म भर देते हैं, इससे मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की एक से अधिक प्रविष्टियां दर्ज होने की समस्या उत्पन्न होती है।

उन्होंने बताया, “ इस संबंध में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को जन सुविधा केंद्र संचालकों को प्रशिक्षण देने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को भी दोहरी प्रविष्टियां रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।”

रिणवा के मुताबिक, फार्म-6 का आवेदन आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के जरिये ई-साइन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम रूप से जमा होता है।

उन्होंने कहा कि ई-साइन के बाद आवेदन की संदर्भ संख्या स्क्रीन पर प्रदर्शित होती है और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भी भेजी जाती है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि नेटवर्क की समस्या के कारण अगर मोबाइल पर संदर्भ संख्या का संदेश नहीं मिलता है तो जन सुविधा केंद्र संचालक स्क्रीन पर प्रदर्शित संख्या का स्क्रीनशॉट लेकर या उसे नोट करके आवेदक को उपलब्ध कराएं, ताकि उसे दोबारा आवेदन न करना पड़े। इस संख्या के माध्यम से आवेदन की स्थिति भी पता की जा सकती है।

रिणवा ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 में आवेदक का वास्तविक और सक्रिय मोबाइल नंबर ही दर्ज किया जाना चाहिए तथा संचालकों को अपना मोबाइल नंबर अथवा कोई गलत या काल्पनिक नंबर दर्ज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि सही मोबाइल नंबर दर्ज होने से आवेदन जमा होने की पुष्टि, अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत संबंधी सूचना और आवेदन की स्थिति की जानकारी समय पर मिलती है।

अधिकारी ने बताया कि इसी नंबर की मदद से मतदाता अपना ई-ईपीआईसी भी डाउनलोड कर सकते हैं।

रिणवा ने आवेदकों को फार्म में निवास का पूरा पता और सही पिन कोड दर्ज करने की सलाह देते हुए कहा कि गलत या अधूरे पते के कारण डाक विभाग द्वारा स्पीड पोस्ट से भेजे गए मतदाता पहचान पत्र वापस किए जा सकते हैं।

उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।

भाषा सलीम जितेंद्र

जितेंद्र