कोलकाता, पांच नवंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार ने हुगली जिले के सिंगूर में भारी वाणिज्यिक वाहन विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए अशोक लेलैंड के साथ शुरुआती बातचीत की है। सरकार इस जगह को टाटा नैनो परियोजना के विवादित रूप से बंद होने के बाद औद्योगिक पुनरुद्धार के प्रतीक के रूप में पेश करना चाहती है।
करीब दो दशक पहले नैनो परियोजना के हटने के कारण राजनीतिक और औद्योगिक इतिहास में अहम स्थान हासिल करने वाला सिंगूर एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार यह दिखाना चाहती है कि राज्य विवादित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को दोहराए बिना बड़े पैमाने पर विनिर्माण निवेश आकर्षित कर सकता है।
अधिकारी ने न्यू टाउन में राज्य की नई निवेश प्रोत्साहन नीति पेश करते हुए कहा, ‘‘हम सिंगूर में निश्चित रूप से कुछ करेंगे। हमने भारी वाणिज्यिक वाहन बनाने वाली प्रतिष्ठित कंपनी अशोक लेलैंड के साथ शुरुआती बातचीत की है।’’
हालांकि, मुख्यमंत्री ने जल्दबाजी में घोषणाएं करने से बचने की बात कही।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार केवल प्रचार के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं करेगी, बल्कि उन परियोजनाओं पर ध्यान देगी जिन्हें वास्तव में जमीन पर उतारा जा सकता है।
अधिकारी ने नैनो परियोजना से जुड़े विवाद पर भी बात की और आश्वासन दिया कि सिंगूर में औद्योगीकरण के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ''उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों पर गोली नहीं चलाई जाएगी।''
उनका इशारा तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के दौरान सिंगूर में टाटा मोटर्स के संयंत्र के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण के दौरान हुई हिंसा की ओर था।
प्रस्तावित परियोजना अभी शुरुआती चरण में है। इसके जरिये भाजपा सिंगूर को औद्योगिक गतिविधियों के ठहराव के प्रतीक से बदलकर राज्य में उद्योगों की वापसी के उदाहरण के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकती है।
भाषा
योगेश अजय
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